राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद भर्ती मामले में लोकपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

Praveen Mishra

29 July 2026 5:10 PM IST

  • राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद भर्ती मामले में लोकपाल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बरकरार

    सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (NPC) में भर्ती और पदोन्नति में कथित अनियमितताओं के मामले में लोकपाल द्वारा दायर याचिका खारिज कर दी।

    लोकपाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के खिलाफ सीबीआई की प्रारंभिक जांच (Preliminary Enquiry) के आदेश को रद्द कर दिया गया था।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में लोकपाल को लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 20 के अनुसार आगे कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी है।

    ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं दिखता।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों से प्रथम दृष्टया कर्तव्य में चूक (Dereliction of Duty) या भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता।

    उन्होंने कहा कि यह अधिक से अधिक निर्णय संबंधी त्रुटि (Error of Judgment) हो सकती है, न कि ऐसा मामला जो भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता हो।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी लोकपाल को आगाह करते हुए कहा कि यदि हर छोटे प्रशासनिक विवाद में नोटिस जारी किए जाएंगे, तो संस्था अनावश्यक मामलों से बोझिल हो जाएगी।

    उन्होंने पूछा कि क्या आरोपों को सही मान लेने पर भी उनमें किसी आपराधिक अपराध का तत्व दिखाई देता है।

    गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20(3) के तहत किसी लोक सेवक के खिलाफ प्रारंभिक जांच का आदेश देने से पहले उसे सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।

    हाईकोर्ट ने पाया था कि लोकपाल ने पहले ही आरोपों पर ठोस राय बना ली थी और उसके बाद संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

    इसी आधार पर हाईकोर्ट ने जुलाई 2024 में लोकपाल द्वारा रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के खिलाफ सीबीआई प्रारंभिक जांच के आदेश और उससे जुड़े नोटिस रद्द कर दिए थे।

    अब सुप्रीम कोर्ट ने भी उस फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए लोकपाल की याचिका खारिज कर दी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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