क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद को भी मिल सकती है जमानत? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए सवाल

Praveen Mishra

22 May 2026 1:34 PM IST

  • क्या ट्रायल में देरी के आधार पर अजमल कसाब या हाफिज सईद को भी मिल सकती है जमानत? दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में उठाए सवाल

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2020 दिल्ली दंगा “बड़ी साजिश” मामले में UAPA के तहत जेल में बंद तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को अंतरिम जमानत देने के संकेत दिए। दोनों आरोपी वर्ष 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।

    जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने दोनों की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के पिछले साल के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अंतरिम जमानत दिए जाने का विरोध नहीं किया। हालांकि उन्होंने UAPA मामलों में ट्रायल में देरी के आधार पर जमानत देने से जुड़े परस्पर विरोधी फैसलों के मुद्दे को बड़ी पीठ के पास भेजने की मांग की।

    खालिद सैफी की ओर से सीनियर एडवोकेट रेबेका एम जॉन ने दलील दी कि उनके खिलाफ सबूत केवल CAA विरोध प्रदर्शन से जुड़े कुछ व्हाट्सऐप ग्रुप चैट्स हैं। उन्होंने कहा कि सैफी पर गल्फिशा फातिमा, नताशा नरवाल और देवांगना कलीता से जुड़े होने का आरोप है, जबकि इन सभी को पहले ही जमानत मिल चुकी है। इसलिए समानता के आधार पर राहत दी जानी चाहिए।

    वहीं तस्लीम अहमद की ओर से अधिवक्ता महमूद पराचा ने कहा कि मामले में उनके मुवक्किल की भूमिका बेहद सीमित है।

    सुनवाई के दौरान ASG एसवी राजू ने कहा कि केवल ट्रायल में देरी जमानत का आधार नहीं हो सकती, खासकर गंभीर मामलों में। उन्होंने अदालत से कहा कि आरोपी की भूमिका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने दलील दी कि हालिया 'सैयद इफ्तिखार अंदराबी' फैसले में केवल देरी के आधार पर जमानत देने का दृष्टिकोण अपनाया गया, जबकि पहले के फैसलों में आरोपी की भूमिका का भी मूल्यांकन किया गया था।

    हालांकि सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि याचिकाकर्ताओं को राहत मिल सकती है। जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा, “पूरी संभावना है कि आपको राहत मिलेगी।” अदालत ने कहा कि वह इस मुद्दे को बड़ी पीठ को भेजने की मांग और अंतरिम राहत दोनों पर आदेश आज या सोमवार तक पारित करेगी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story