पेपर लीक मामलों की जांच के लिए SOP बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई अनिच्छा, कहा- 'यह हमारे विचार का विषय नहीं'

Praveen Mishra

21 July 2026 2:14 PM IST

  • पेपर लीक मामलों की जांच के लिए SOP बनाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई अनिच्छा, कहा- यह हमारे विचार का विषय नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 जुलाई) को प्रश्नपत्र लीक मामलों की समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए 'स्टैंडर्ड प्रश्नावली' और 'विशेष जांच प्रक्रिया (SOP)' तैयार करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान इसे विचार योग्य मानने में अनिच्छा जताई।

    जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने मौखिक रूप से कहा, "यह हमारे विचार का विषय नहीं है।" हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह के आग्रह पर अदालत ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी। पीठ ने कहा कि वह पहले नीट (NEET) परीक्षा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) से जुड़े लंबित मामलों पर सुनवाई करेगी।

    यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने हालिया नीट पेपर लीक की घटनाओं के मद्देनजर दायर की है। याचिका में कहा गया है कि प्रश्नपत्र लीक की घटनाओं को रोकने, उनकी प्रभावी जांच करने और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने में लगातार विफलता रही है, जिससे छात्रों के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 के तहत प्राप्त मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू होने के बावजूद उसमें कई कमियां हैं। इसमें न तो समयबद्ध जांच और ट्रायल का प्रावधान है, न ही मानक जांच प्रक्रिया (Standard Investigation Procedure) निर्धारित की गई है। साथ ही, पेपर लीक के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए आवश्यक जांच तंत्र भी पर्याप्त नहीं है।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि ऐसे मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और बेनामी संपत्ति कानून के प्रावधान लागू किए जाएं तथा दोषियों और उनके परिवार की चल-अचल संपत्तियों को जब्त करने की व्यवस्था की जाए।

    याचिका में कहा गया है कि पेपर लीक की घटनाएं केवल छात्रों के शैक्षणिक और रोजगार संबंधी अवसरों को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि उनके और उनके परिवारों के मानसिक, आर्थिक एवं सामाजिक जीवन पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story