सुप्रीम कोर्ट ने 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त हटाई, लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत

Praveen Mishra

21 Aug 2026 12:35 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने 2027 तक न्यायिक सेवा में 3 साल की प्रैक्टिस शर्त हटाई, लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत

    सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) भर्ती में तीन साल की प्रैक्टिस अनिवार्यता को लेकर संक्रमणकालीन अवधि में लॉ ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि 20 मई 2025 से 31 मार्च 2027 के बीच जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के तहत सभी लॉ ग्रेजुएट्स, तीन साल की प्रैक्टिस के बिना भी परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन (असहमति) की पीठ ने कहा कि इस अवधि में आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को एक साल की सक्रिय प्रैक्टिस पूरी करने वाला माना जाएगा और इस अवधि के लिए अलग से प्रैक्टिस सर्टिफिकेट देने की जरूरत नहीं होगी।

    हालांकि, चयनित उम्मीदवारों को सीधे नियमित न्यायिक अधिकारी के रूप में नियुक्त नहीं किया जाएगा। उन्हें पहले ट्रेनी ज्यूडिशियल ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जाएगा।

    एक साल ट्रेनिंग और एक साल क्लर्कशिप

    चयनित उम्मीदवारों को एक साल की गहन ट्रेनिंग संबंधित राज्य की Judicial Academy में करनी होगी। इसके बाद एक साल की स्ट्रक्चर्ड लॉ क्लर्कशिप होगी। इसमें छह महीने Principal District Judge/District & Sessions Judge या Higher Judicial Service के सदस्य के अधीन तथा अगले छह महीने संबंधित हाईकोर्ट के मौजूदा जज के अधीन क्लर्कशिप करनी होगी।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की कुल दो साल की अवधि को तीन साल की प्रैक्टिस की आवश्यकता के लिए दो साल की बार प्रैक्टिस के बराबर माना जाएगा।

    1 अप्रैल 2027 के बाद क्या होगा?

    1 अप्रैल 2027 या उसके बाद जारी होने वाली भर्ती अधिसूचनाओं के लिए उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने से पहले कम से कम एक साल की वास्तविक सक्रिय प्रैक्टिस करनी होगी। इसके बाद चयनित उम्मीदवारों को भी एक साल की Judicial Academy ट्रेनिंग और एक साल की क्लर्कशिप पूरी करनी होगी।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मई 2025 में तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त अचानक बहाल किए जाने से उन लॉ ग्रेजुएट्स को कठिनाई हुई, जिन्होंने उस समय लागू व्यवस्था के आधार पर अपने करियर की तैयारी की थी। इसलिए संक्रमणकालीन व्यवस्था के तहत यह राहत दी गई है।

    इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story