'अधिकारियों की लापरवाही से सार्वजनिक ढांचा हुआ क्षतिग्रस्त': जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

Praveen Mishra

10 March 2026 5:11 PM IST

  • अधिकारियों की लापरवाही से सार्वजनिक ढांचा हुआ क्षतिग्रस्त: जोजरी नदी प्रदूषण मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

    राजस्थान की जोजरी नदी के प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नदी के पुनर्जीवन के लिए गठित हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी को पर्याप्त लॉजिस्टिक सहायता नहीं दी जा रही है।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजस्थान के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत के समक्ष सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली से ऐसा प्रतीत नहीं होता कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं।

    सुनवाई के दौरान जस्टिस मेहता ने कहा कि जो तस्वीरें सामने आई हैं, उनसे स्पष्ट है कि नदी के किनारे स्थिर पानी के कारण बिजली के खंभे तक छोड़ दिए गए हैं और सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि लोगों की परेशानी अपनी जगह है, लेकिन सरकारी बुनियादी ढांचा भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, क्योंकि अधिकारी लंबे समय से कार्रवाई करने में ढिलाई बरत रहे थे। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि लगभग 100 फैक्ट्रियां कृषि भूमि पर बिना अनुमति के चल रही हैं।

    शुरुआत में खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को अगली सुनवाई पर तलब करने का संकेत दिया था ताकि यह बताया जा सके कि समिति को पर्याप्त सहायता क्यों नहीं दी जा रही। हालांकि बाद में ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया।

    अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 21 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार गठित समिति ने लगभग 202 पृष्ठों की अंतरिम रिपोर्ट प्रस्तुत की है, जिसमें किए गए कार्यों, सिफारिशों और कार्य के दौरान आई लॉजिस्टिक समस्याओं का उल्लेख किया गया है। अदालत ने समिति के अध्यक्ष से रिपोर्ट की सॉफ्ट कॉपी सभी पक्षों के वकीलों को उपलब्ध कराने को कहा।

    राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को आश्वासन दिया कि समिति द्वारा उठाए गए मुद्दों—जैसे पर्याप्त मानव संसाधन और आधिकारिक सहयोग की कमी—को अगली सुनवाई से पहले दूर कर दिया जाएगा।

    पृष्ठभूमि

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने से शुरू हुआ था, जब यह सामने आया कि औद्योगिक कचरा, खासकर फैक्ट्रियों से निकलने वाला अपशिष्ट, जोजरी नदी में डाला जा रहा है। इससे सैकड़ों गांव प्रभावित हो रहे हैं और पीने का पानी भी दूषित हो गया है।

    इस मामले का संज्ञान लेने से पहले 12 सितंबर को “News Pinch” नामक यूट्यूब चैनल पर “2 Million Lives at Risk | India's Deadliest River | Marudhara | Jojari | Rajasthan” नाम की एक डॉक्यूमेंट्री अपलोड की गई थी, जिसमें नदी प्रदूषण की गंभीर स्थिति दिखाई गई थी।

    नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की दशकों से चली आ रही निष्क्रियता पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूर्व हाईकोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी गठित की थी। इस समिति को जोजरी–बांडी–लूणी नदी प्रणाली के पुनर्जीवन के लिए विस्तृत और समयबद्ध योजना (River Restoration Blueprint) तैयार करने और उसके चरणबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने का दायित्व दिया गया है।

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