सुप्रीम कोर्ट ने लिफ़्ट की खराबी से RAW अफ़सर की मौत के लिए OTIS को ज़िम्मेदार ठहराया, कहा- लिफ़्ट बनाने वालों की सावधानी बरतने की ज़िम्मेदारी ज़्यादा होती है

Shahadat

29 July 2026 9:00 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने लिफ़्ट की खराबी से RAW अफ़सर की मौत के लिए OTIS को ज़िम्मेदार ठहराया, कहा- लिफ़्ट बनाने वालों की सावधानी बरतने की ज़िम्मेदारी ज़्यादा होती है

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (29 जुलाई) को OTIS एलिवेटर कंपनी (इंडिया) लिमिटेड की ज़िम्मेदारी बरकरार रखा, जो 2003 में नई दिल्ली में RAW हेडक्वार्टर में लिफ़्ट की खराबी के कारण कुचलकर मारे गए रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के एक अफ़सर की मौत के मामले में तय की गई थी।

    नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के आदेश के ख़िलाफ़ OTIS की अपील खारिज करते हुए जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने OTIS को - जो निर्माता और व्यापक रखरखाव ठेकेदार दोनों थी - वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण लिफ़्ट की खराबी से हुई अफ़सर की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराया। वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या को एलिवेटर कंपनी ने लगभग आठ महीनों तक ठीक नहीं किया था।

    कोर्ट ने कहा,

    "जो पार्टी किसी ऐसी मशीन का व्यापक रखरखाव करती है, जो वाहन की तरह होती है, उसकी यूज़र्स के प्रति सावधानी बरतने की ज़िम्मेदारी ज़्यादा होती है। OTIS उस खराबी से अनजान नहीं थी जिसके कारण दुर्घटना हुई। उसे समस्या की जानकारी थी और उसने खुद ही समाधान का प्रस्ताव दिया। ऐसा करने के बाद समाधान को लागू न कर पाना, या वैकल्पिक रूप से, इंस्टॉलेशन होने तक लिफ़्ट को दूसरे तरीकों से सुरक्षित न बना पाना, सेवा में कमी (deficiency of service) माना जाएगा।"

    यह मामला तब का है, जब रेस्पॉन्डेंट नंबर 1 के पति, जो RAW अफ़सर थे, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण एलिवेटर में खराबी से मारे गए। अपीलकर्ता-OTIS ने ज़िम्मेदारी से इनकार करते हुए कहा कि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या के बारे में मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MES) को विधिवत सूचित किया गया, जिसे एलिवेटर के रखरखाव का ठेका दिया गया।

    NCDRC ने OTIS को मुख्य रूप से ज़िम्मेदार ठहराया और कंपनी पर 70%, MES पर 25% और RAW पर 5% ज़िम्मेदारी तय की। इसने ब्याज सहित ₹3.01 करोड़ का मुआवज़ा देने का आदेश दिया था। RAW और MES की अपीलें पहले ही खारिज हो चुकी थीं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सामने केवल OTIS की चुनौती बची थी।

    जन सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए अपने फ़ैसले में जस्टिस नरसिम्हा ने लिखा कि एलिवेटर शहरी जीवन का एक ज़रूरी हिस्सा बन गए हैं और यात्री अपनी सुरक्षा पूरी तरह से इस सिस्टम पर छोड़ देते हैं। कोर्ट ने कहा कि "लिफ्ट को एक 'कॉमन कैरियर' (सार्वजनिक परिवहन सेवा) माना जाना चाहिए।" कोर्ट ने आगे कहा कि इस पर "खास सावधानी बरतने की ज़िम्मेदारी" डालना कानूनी रूप से ज़रूरी है, क्योंकि यात्रियों का लिफ्ट के संचालन पर कोई नियंत्रण नहीं होता और वे पूरी तरह से ऑटोमेशन या ऑपरेटरों पर निर्भर होते हैं।

    बेंच ने आगे कहा कि पब्लिक लॉ (सार्वजनिक कानून) के नज़रिए से, मैन्युफैक्चरर्स, ऑपरेटरों और परिसर के मालिकों को ज़िम्मेदारी उठाने वाला माना जाना चाहिए और पीड़ितों को मुआवज़ा देने के लिए उन्हें संयुक्त रूप से और अलग-अलग तौर पर ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मुआवज़ा पाने से पहले अलग-अलग ज़िम्मेदार पक्षों (टॉर्टफीसर्स) की आपसी ज़िम्मेदारी तय करने का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाना चाहिए।

    कंपनी की दलील को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह MES पर दोष मढ़कर अपनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकती। कोर्ट ने गौर किया कि लगभग आठ महीनों तक खराबी की जानकारी होने के बावजूद, कंपनी 'सर्विस लाइन वोल्टेज करेक्टर स्टेबलाइज़र' लगाने में नाकाम रही, जो उसकी अपनी सिफारिशों के अनुसार लिफ्ट के सुरक्षित संचालन और सुरक्षा के लिए ज़रूरी था। कोर्ट ने कहा कि लिफ्ट कंपनी वोल्टेज में उतार-चढ़ाव की समस्या ठीक होने तक लिफ्ट के इस्तेमाल को जानबूझकर रोक सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

    कोर्ट ने कहा,

    "यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि OTIS का अपना व्यवहार यह साबित करता है कि उसे कम-से-कम 04.07.2002 से - यानी दुर्घटना से आठ महीने पहले से - यह पता था कि बार-बार लिफ्ट का रुकना वोल्टेज में उतार-चढ़ाव के कारण भी हो रहा था, और 'हमारे उपकरणों की सुरक्षा और सुरक्षित संचालन के लिए' 'सर्विस लाइन वोल्टेज करेक्टर स्टेबलाइज़र' ज़रूरी था। समाधान की पहचान खुद करने के बाद, OTIS की - जो क्लॉज़ 3.1 के तहत लिफ्ट के सुरक्षित संचालन के लिए ज़िम्मेदार पक्ष थी - यह ज़िम्मेदारी थी कि वह इस सिफारिश पर अमल करती, स्टेबलाइज़र लगने तक लिफ्ट को लगातार इस्तेमाल के लिए फिट प्रमाणित करने से इनकार करती, या कम से कम इस मामले को आगे बढ़ाती, क्योंकि जुलाई और अगस्त 2002 में भी खराबी लगातार होती रही, जैसा कि 05.07.2002 और 29.08.2002 के पत्रों में दर्ज है। ऐसा करने के बजाय, लिफ्ट का रोज़ाना संचालन जारी रहा और उसमें RAW के वरिष्ठ अधिकारी यात्रा करते रहे, जबकि वे सुरक्षा उपाय नहीं किए गए जिन्हें OTIS ने खुद ज़रूरी बताया।"

    कोर्ट ने OTIS की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि यह हादसा सिर्फ़ MES कर्मचारियों द्वारा ब्रेक को मैन्युअल रूप से हटाने (manual release) की वजह से हुआ। हालांकि, टेक्निकल रिपोर्ट में हादसे की वजह ब्रेक को मैन्युअल रूप से हटाना बताया गया, लेकिन कोर्ट ने माना कि इससे OTIS की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती, क्योंकि वह "लिफ्ट की इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल फिटिंग और उन्हें अच्छी हालत में बनाए रखने के लिए उनकी देखरेख (मेंटेनेंस) के लिए ज़िम्मेदार थी, ताकि हादसे का खतरा न हो।"

    कोर्ट ने कहा,

    "OTIS लिफ्ट बनाने वाली कंपनी और उसकी पूरी देखरेख करने वाली कॉन्ट्रैक्टर, दोनों थी। इस वजह से उसे सेफ्टी इंटरलॉक, ब्रेक मैकेनिज्म और इलेक्ट्रिकल सर्किट जैसे फीचर्स के बारे में खास जानकारी और उन पर कंट्रोल हासिल था, जिनकी खराबी की वजह से यह जानलेवा हादसा हुआ। यह स्थिति RAW या MES से काफी अलग है; इनमें से किसी के पास भी उन कमियों का पता लगाने या उन्हें ठीक करने के लिए ज़रूरी टेक्निकल साधन नहीं थे, जिनकी जानकारी उन्हें दी जा रही थी।"

    कोर्ट ने आगे कहा,

    "हम अपील करने वाले की इस बात को नहीं मान सकते कि हादसे की पूरी ज़िम्मेदारी MES की है, क्योंकि उसके कर्मचारियों ने 'ब्रेक रिलीज़ की' (Brake Release Key) से ब्रेक को मैन्युअल रूप से हटाया था। हालांकि, टेक्निकल रिपोर्ट में हादसे की वजह ब्रेक को मैन्युअल रूप से हटाना बताया जा सकता है, लेकिन हमारी नज़र में इस बात से OTIS की ज़िम्मेदारी खत्म नहीं होती, क्योंकि ब्रेक को मैन्युअल रूप से हटाना कोई अलग-थलग घटना नहीं थी। इस घटना को उन कई वजहों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए जिनका ज़िक्र किया गया।"

    इन बातों को ध्यान में रखते हुए अपील खारिज की गई।

    कोर्ट ने माना,

    "हमारी नज़र में OTIS पर 70%, MES पर 25% और RAW पर 5% ज़िम्मेदारी तय करना, हादसे के लिए हर पार्टी की जानकारी, कंट्रोल और ज़िम्मेदारी के अलग-अलग स्तर को सही ढंग से दिखाता है। इस कोर्ट को इसमें दखल देने की कोई ज़रूरत नहीं है।"

    Cause Title: M/S OTIS ELEVATOR CO. (INDIA) LTD. VERSUS RASHMI HANDA & ORS. (with connected case)

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