गुजरात के चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों को खिलाने के लिए भैंसों के वध पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
Praveen Mishra
18 May 2026 4:22 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के दो चिड़ियाघरों में जंगली जानवरों को खिलाने के लिए परिसर के भीतर भैंसों के वध के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें इस प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज किया गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन नियमों का हवाला दिया जा रहा है, वे मुख्य रूप से मानव उपभोग के लिए संचालित बूचड़खानों पर लागू होते हैं। जस्टिस मेहता ने टिप्पणी की,
“उन्हें चिड़ियाघर जैसे चलाना है चलाने दीजिए। वास्तव में आपको तो यह कहते हुए PIL दाखिल करनी चाहिए थी कि चिड़ियाघर ही हटा दिए जाएं, क्योंकि वह भी जानवरों के प्रति क्रूरता है।”
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट निखिल गोयल ने दलील दी कि चिड़ियाघर परिसर में पशुओं का वध भी नियमों के अधीन होना चाहिए, भले ही वह व्यावसायिक उद्देश्य से न हो। उन्होंने कहा कि गुजरात के कुछ चिड़ियाघरों में जीवित भैंसों को लाकर परिसर के भीतर ही काटा जाता है, जिससे प्रदूषण और अन्य समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों से सहमति नहीं जताई और याचिका खारिज कर दी। इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने भी कहा था कि खाद्य सुरक्षा नियम इस मामले में लागू नहीं होते, क्योंकि मांस मानव उपभोग के लिए नहीं बल्कि जंगली जानवरों के भोजन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

