प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने NCLT को नया फैसला लेने को कहा

Praveen Mishra

4 Feb 2026 11:57 AM IST

  • प्रतिस्पर्धा अधिनियम के तहत फ्लिपकार्ट के खिलाफ जांच की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने NCLT को नया फैसला लेने को कहा

    सुप्रीम कोर्ट ने फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम के कथित उल्लंघन की जांच के लिए 2020 में राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) द्वारा पारित आदेश को मंगलवार को रद्द कर दिया। अदालत ने यह मामला नए सिरे से विचार के लिए एनसीएलएटी को वापस भेज दिया है।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने यह आदेश उस दलील के बाद पारित किया, जिसमें फ्लिपकार्ट ने कहा कि एनसीएलएटी का आदेश आयकर कार्यवाही में असेसिंग ऑफिसर की टिप्पणियों पर आधारित था, जिन्हें बाद में आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) ने निरस्त कर दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने सभी मुद्दों को एनसीएलएटी के समक्ष नए सिरे से विचार के लिए खुला छोड़ दिया है।

    खंडपीठ ने कहा:

    “हम एनसीएलएटी से अनुरोध करते हैं कि वह अपील पर पुनः विचार करे और इस न्यायालय द्वारा 'कोल इंडिया लिमिटेड' सहित अनेक फैसलों में निर्धारित सिद्धांतों को ध्यान में रखे। पक्षकारों को यह तर्क रखने की स्वतंत्रता होगी कि क्या प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि हाँ, तो क्या मामले को दोबारा CCI को भेजने की आवश्यकता है।”

    फ्लिपकार्ट की दलीलें

    फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि:

    फ्लिपकार्ट को कभी भी संबंधित बाजार में प्रभुत्वशाली (dominant) नहीं पाया गया,

    न ही उसके द्वारा प्रभुत्व के दुरुपयोग का कोई निष्कर्ष निकाला गया है,

    एनसीएलएटी का आदेश आयकर कार्यवाही में असेसिंग ऑफिसर की टिप्पणियों पर आधारित था, जिन्हें बाद में ITAT ने रद्द कर दिया,

    प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने भी यह पाया था कि फ्लिपकार्ट प्रभुत्वशाली इकाई नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस में अमेज़न प्रमुख खिलाड़ी है, न कि फ्लिपकार्ट, और कोल इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए मानदंड फ्लिपकार्ट के मामले में लागू नहीं होते।

    अन्य पक्षों की दलीलें

    ऑल इंडिया ऑनलाइन वेंडर्स एसोसिएशन (AIOVA) की ओर से पेश वकील ने कहा कि ITAT ने असेसमेंट ऑर्डर को केवल कानूनी आधार पर पलटा था और व्यवसाय मॉडल से जुड़ी टिप्पणियों में हस्तक्षेप नहीं किया गया था।

    वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता राजशेखर राव, फ्लिपकार्ट इंडिया की ओर से पेश होते हुए, ने कहा कि आयकर कार्यवाही फ्लिपकार्ट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (जो एक B2B थोक इकाई है और जिसका बाजार हिस्सा बहुत कम है) से संबंधित थी।

    उन्होंने तर्क दिया कि उन टिप्पणियों को गलत तरीके से फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राइवेट लिमिटेड, जो ऑनलाइन मार्केटप्लेस का संचालन करती है, पर लागू किया गया।

    मामले की पृष्ठभूमि

    4 मार्च 2020 को एनसीएलएटी ने CCI के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें AIOVA की शिकायत को यह कहते हुए बंद कर दिया गया था कि फ्लिपकार्ट के खिलाफ प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 की धारा 4 (प्रभुत्व के दुरुपयोग) के उल्लंघन का कोई मामला नहीं बनता।

    एनसीएलएटी ने तब प्रथम दृष्टया यह माना था कि फ्लिपकार्ट ने प्रभुत्व का दुरुपयोग और शिकारी मूल्य निर्धारण (predatory pricing) किया है और इसलिए CCI द्वारा शिकायत बंद करने का आदेश निरस्त कर दिया था।

    इससे पहले, नवंबर 2018 में AIOVA ने CCI के समक्ष शिकायत दायर कर फ्लिपकार्ट और अमेज़न पर बाजार प्रभुत्व के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। हालांकि, 6 नवंबर 2018 को CCI ने यह कहते हुए शिकायत खारिज कर दी थी कि फ्लिपकार्ट और अमेज़न की व्यावसायिक गतिविधियाँ प्रतिस्पर्धा कानूनों का उल्लंघन नहीं करतीं।

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