दूसरी शिकायत में नए गंभीर आरोप जोड़ने से अभियोजन पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की

  • दूसरी शिकायत में नए गंभीर आरोप जोड़ने से अभियोजन पर संदेह: सुप्रीम कोर्ट ने FIR रद्द की

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि दूसरी शिकायत में ऐसे महत्वपूर्ण आरोप जोड़े जाते हैं जो पहली शिकायत में मौजूद नहीं थे, तो इससे अभियोजन की विश्वसनीयता पर संदेह पैदा होता है और ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की खंडपीठ एक भूमि विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई कर रही थी।

    शिकायतकर्ता ने दूसरी शिकायत में पहली बार जबरन वसूली, धन की मांग और धमकी के आरोप लगाए थे, जबकि मई 2009 में दर्ज पहली शिकायत में ऐसे आरोप नहीं थे।

    अदालत ने पाया कि वर्ष 2000 से चल रहे दीवानी विवाद के दौरान भी शिकायतकर्ता ने कभी जबरन वसूली, जालसाजी या आपराधिक साजिश जैसे आरोप नहीं लगाए थे।

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरी शिकायत में किए गए ये "मटेरियल इम्प्रूवमेंट्स" विवाद को आपराधिक रंग देने का प्रयास प्रतीत होते हैं।

    गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली शिकायत को छिपाने और बाद में गंभीर आरोप जोड़ने के कानूनी प्रभाव पर विचार नहीं किया गया।

    इसके साथ ही अदालत ने FIR और लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story