सिर्फ 'संदेह' के आधार पर बैंक अकाउंट फ्रीज नहीं कर सकती ED, 'Reasons to Believe' अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
1 Aug 2026 12:12 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2000 की धारा 17(1A) के तहत केवल 'संदेह' (Suspicion) के आधार पर बैंक खाते फ्रीज नहीं किए जा सकते। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी के पास 'Reasons to Believe' (विश्वास के कारण) होना अनिवार्य है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमति जताते हुए कहा कि भले ही धारा 17(1A) में "Reasons to Believe" शब्दों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, लेकिन इसे धारा 17(1) से अलग करके नहीं पढ़ा जा सकता। जब्ती (Seizure) के लिए 'Reasons to Believe' आवश्यक है और चूंकि फ्रीज करना जब्ती का ही एक वैकल्पिक उपाय है, इसलिए उस पर भी वही मानक लागू होगा।
मामला पूनम मलिक के दो बैंक खातों को फ्रीज करने से जुड़ा था। पूनम मलिक, कथित स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले के आरोपी गगन धवन से जुड़े बताए गए रंजीत मलिक की पत्नी हैं। हालांकि, न तो पूनम मलिक और न ही उनके पति का नाम FIR या ECIR में था।
ED के फ्रीजिंग आदेश में केवल यह कहा गया था कि "संदेह है कि बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग की रकम हो सकती है", इसलिए खाते से डेबिट लेनदेन रोक दिया जाए। बाद में निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) ने इस आदेश की पुष्टि की, लेकिन अपीलीय अधिकरण ने इसे रद्द कर दिया। इसके बाद ED दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची।
दिल्ली हाईकोर्ट ने ED की कार्रवाई को अवैध बताते हुए कहा था कि बिना वैधानिक आवश्यकताओं और प्रक्रिया का पालन किए जारी किया गया फ्रीजिंग आदेश कानून की कसौटी पर टिक नहीं सकता। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि बिना उचित आधार के किसी बैंक खाते को फ्रीज करना संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण को बरकरार रखते हुए ED की अपील खारिज कर दी।


