पत्नी को जानवर की तरह नहीं रख सकता पति, उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
11 May 2026 3:44 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू हिंसा के आरोपी एक व्यक्ति को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि पति अपनी पत्नी के साथ जानवरों जैसा व्यवहार नहीं कर सकता और उसे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की खंडपीठ आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है।
मामले में आरोप है कि आरोपी ने शराब के नशे में अपनी पहली पत्नी के साथ मारपीट की। शिकायत के अनुसार, उसने पत्नी को जमीन पर फेंक दिया, जिससे उसका सिर ईंट से टकरा गया, और बाद में लाठी से हमला किया। अभियोजन का यह भी कहना है कि आरोपी ने तीन शादियां की हैं और पहली पत्नी को कोई खर्च भी नहीं दिया। हालांकि, आरोपी ने शिकायतकर्ता से शादी होने से ही इनकार किया है।
पटना हाईकोर्ट ने पहले ही आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि आरोपी ने तीन विवाह किए हैं और पहली पत्नी के साथ मारपीट करने के बाद भी उसका भरण-पोषण नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस वराले ने टिप्पणी की, “पत्नी के साथ जानवरों जैसा व्यवहार करने का कोई कारण नहीं हो सकता।” वहीं जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि आरोप गंभीर हैं, इसलिए आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।
जस्टिस कुमार ने आरोपी से कहा, “आप अपनी पत्नी को क्यों मारना चाहते हैं? नियमित जमानत के लिए आवेदन कीजिए। आपकी तीन पत्नियां हैं, अब यह महिला भी आपको छोड़ देगी अगर आप उसके साथ मारपीट करेंगे।”
सुनवाई के दौरान जस्टिस कुमार ने एक अनुभव साझा करते हुए बताया कि कानूनी सहायता कार्यक्रम के तहत किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि हर शनिवार दो अलग-अलग थानों में ऐसे घरेलू हिंसा के मामले दर्ज होते थे।
उन्होंने कहा कि एक थाने में पत्नी शिकायतकर्ता होती थी, क्योंकि पति साप्ताहिक मजदूरी मिलने के बाद शराब पीकर पत्नी को पीटता था। वहीं दूसरे थाने में पति शिकायतकर्ता होता था, जहां पत्नी कहती थी कि “शराब पीने से मुझे समस्या नहीं है, लेकिन हाथ मत उठाओ।”
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।

