दिल्ली के विरासत स्मारकों के संरक्षण की निगरानी करेगा सुप्रीम कोर्ट, शेख अली 'गुमटी' मामले का दायरा बढ़ा

Praveen Mishra

16 Jan 2026 4:01 PM IST

  • दिल्ली के विरासत स्मारकों के संरक्षण की निगरानी करेगा सुप्रीम कोर्ट, शेख अली गुमटी मामले का दायरा बढ़ा

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संकेत दिया है कि वह दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत स्थलों के रखरखाव और संरक्षण की निगरानी करना चाहता है, क्योंकि कई ऐसे स्मारक सरकारी लापरवाही के कारण उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं।

    यह टिप्पणी कोर्ट ने लोदी कालीन शेख अली 'गुमटी', जो लगभग 500 वर्ष पुराना ऐतिहासिक मकबरा है, उससे जुड़े अवैध अतिक्रमण के मामले की सुनवाई के दौरान की।

    जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन. के. सिंह की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

    शेख अली 'गुमटी' का मामला

    गुमटी पर लंबे समय से डिफेंस कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशन (DCWA) द्वारा अवैध कब्जा किया गया था। इसके अलावा, दिल्ली नगर निगम (MCD) वहां बिना अनुमति कार्यालय और पार्किंग संचालित कर रहा था।

    सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष इस अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए कई आदेश पारित किए थे और स्मारक के पुनर्स्थापन (restoration) की प्रक्रिया की निगरानी भी कर रहा है।

    13 जनवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने यह दर्ज किया कि गुमटी का पुनर्स्थापन “सही भावना” (right spirit) के साथ किया जा रहा है। अदालत ने पुनर्स्थापन के लिए प्रस्तुत अंतिम ड्राफ्ट योजना को मंजूरी दी, जिसके क्रियान्वयन में लगभग चार महीने लगेंगे।

    मामले के दायरे का विस्तार

    कोर्ट को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता राजीव सूरी ने एक नई अर्जी दाखिल कर मामले के दायरे को बढ़ाने का अनुरोध किया है, ताकि दिल्ली के अन्य विरासत स्थल, जो विभिन्न वैधानिक प्राधिकरणों (जैसे ASI आदि) के अधीन हैं लेकिन जिनका उचित संरक्षण नहीं हो रहा, उन्हें भी इस याचिका में शामिल किया जा सके।

    अर्जी में कहा गया है कि दिल्ली में विरासत संरक्षण की प्रक्रिया “एड-हॉक और चेरी-पिकिंग” वाली रही है और बड़ी संख्या में स्मारक बिना सुरक्षा और संरक्षण के बदहाल स्थिति में पड़े हैं।

    याचिकाकर्ता ने मांग की है कि:

    सभी विरासत स्थलों की समयबद्ध सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार की जाए

    मौजूदा सूची 10 वर्ष से अधिक पुरानी होने के कारण अपडेट की जाए

    विरासत स्थलों की संख्या

    अर्जी में दी गई जानकारी के अनुसार:

    ASI के अधीन: 174 विरासत स्थल

    दिल्ली सरकार (GNCTD) के अधीन: 554 स्थल

    MCD के अधीन: 767 स्थल

    CPWD के अधीन: लगभग 20 स्थल

    कोर्ट ने माना कि इन स्थलों के संबंध में अद्यतन जानकारी का अभाव है।

    नए पक्षकारों को नोटिस

    स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने:

    दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA)

    नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC)

    दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड

    केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD)

    को मामले में पक्षकार बनाते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है।

    पृष्ठभूमि

    21 जनवरी 2025 से कोर्ट लगातार आदेश पारित कर DCWA को गुमटी का कब्जा भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को सौंपने के निर्देश दे रहा था।

    कोर्ट ने DCWA पर ₹40 लाख का जुर्माना भी लगाया, जिसे स्मारक के पुनर्स्थापन में उपयोग करने का निर्देश दिया गया।

    14 मई को DCWA ने गुमटी का शांतिपूर्ण कब्जा सौंप दिया, लेकिन MCD ने परिसर को कचरे, टूटी दीवारों और बिना बिजली की स्थिति में छोड़ा।

    इसके बाद कोर्ट ने MCD को स्थल की पूरी सफाई और मूल स्वरूप में पार्क के रखरखाव का आदेश दिया।

    CBI जांच और विशेषज्ञ की नियुक्ति

    अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने यह जांचने के लिए CBI को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया था कि ASI और केंद्र सरकार ने स्मारक को संरक्षण क्यों नहीं दिया।

    CBI रिपोर्ट में सामने आया कि DCWA लगभग 60 वर्षों से गुमटी को अपने कार्यालय के रूप में इस्तेमाल कर रही थी और उसमें कई अनधिकृत संरचनात्मक बदलाव किए गए थे।

    इसके बाद 14 नवंबर 2024 को कोर्ट ने स्वप्ना लिडल (INTACH की पूर्व संयोजक और दिल्ली के इतिहास पर कई पुस्तकों की लेखिका) को विशेषज्ञ के रूप में नियुक्त किया, ताकि क्षति का आकलन कर यह बताया जा सके कि स्मारक को किस हद तक और किस प्रकार बहाल किया जा सकता है।

    निष्कर्ष

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह केवल शेख अली गुमटी तक सीमित न रहकर, दिल्ली के अन्य उपेक्षित विरासत और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण पर भी सक्रिय निगरानी करेगा, ताकि ऐतिहासिक धरोहरों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखा जा सके।

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