दारा सिंह की समयपूर्व रिहाई पर फैसला न लेने से सुप्रीम कोर्ट नाराज, ओडिशा सरकार को फटकार
Praveen Mishra
8 Sept 2026 6:09 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे दारा सिंह उर्फ रवींद्र कुमार पाल की समयपूर्व रिहाई की याचिका पर फैसला नहीं लेने को लेकर ओडिशा सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने सरकार द्वारा चार सप्ताह का समय मांगे जाने पर नाराजगी जताई। राज्य की ओर से यह समय उसके अधिवक्ता के बीमार होने के आधार पर मांगा गया था।
जस्टिस मिश्रा ने कहा—
“आप इस मामले को इस तरह क्यों टाल रहे हैं? फैसला लीजिए, स्वीकार करें या खारिज करें।”
कोर्ट ने याद दिलाया कि 19 अगस्त 2026 को ही ओडिशा सरकार को दारा सिंह की रिहाई के आवेदन पर फैसला लेने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद राज्य ने फिर समय मांग लिया।
बार-बार स्थगन पर कोर्ट सख्त
जब राज्य के वकील ने 17 सितंबर तक समय मांगा तो जस्टिस बिश्नोई ने कहा—
“आप इस तरह आगे नहीं बढ़ सकते।”
जस्टिस मिश्रा ने कहा कि यह मामला करीब दो साल से बार-बार स्थगित हो रहा है। जब राज्य के वकील ने कहा कि उनके पास इस मुद्दे पर कोई निर्देश नहीं है, तो कोर्ट ने चेतावनी दी कि फैसला नहीं लिया गया तो राज्य के सचिव को तलब किया जाएगा।
अंततः कोर्ट ने मामले को 17 सितंबर को सूचीबद्ध करते हुए ओडिशा सरकार से 19 अगस्त के आदेश के अनुपालन में लिए गए फैसले की जानकारी देने को कहा।
दारा सिंह ने 25 साल से अधिक जेल में बिताने की बात कही
दारा सिंह समयपूर्व रिहाई की मांग कर रहा है और उसका कहना है कि वह 25 साल से अधिक समय जेल में बिता चुका है। राज्य की मौजूदा नीति के तहत, ऐसे दोषियों के मामले में 25 साल की कैद पूरी होने के बाद सजा में छूट पर विचार किया जा सकता है, जिनकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदला गया हो।
दारा सिंह को 2003 में ट्रायल कोर्ट ने मृत्युदंड सुनाया था। 2005 में ओडिशा हाईकोर्ट ने मृत्युदंड को उम्रकैद में बदल दिया, जिसे 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
दारा सिंह ने अपनी याचिका में दावा किया है कि अपराध “युवा अवस्था के आवेश” में हुआ था और अब उसे अपने कृत्य पर पछतावा है। उसने सजा के सुधारात्मक सिद्धांत का हवाला देते हुए समाज में एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में लौटने के लिए समयपूर्व रिहाई की मांग की है।
क्या था ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड?
घटना 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के क्योंझर जिले के मनोहरपुर गांव में हुई थी। अभियोजन के अनुसार, दारा सिंह के नेतृत्व वाली भीड़ ने उस वाहन में आग लगा दी थी, जिसमें ग्राहम स्टेन्स और उनके दो बेटे फिलिप (10) और टिमोथी (6) सो रहे थे।
अब सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को इस मामले में फैसला लेने के लिए एक और अंतिम अवसर दिया है।


