ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: दारा सिंह की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को दिया समय

Praveen Mishra

15 July 2026 5:05 PM IST

  • ग्राहम स्टेन्स हत्याकांड: दारा सिंह की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार को दिया समय

    सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो नाबालिग बेटों की हत्या के दोषी दारा सिंह (रवींद्र कुमार पाल) की समयपूर्व रिहाई (Premature Release) की याचिका पर ओडिशा सरकार को 19 अगस्त 2026 तक निर्णय लेने का निर्देश दिया।

    जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार ने बताया कि राज्य की सेंटेंस रिव्यू बोर्ड (Sentence Review Board) ने मामले के शेष रिकॉर्ड मंगवाए हैं और उनके उपलब्ध होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त तय करते हुए उम्मीद जताई कि तब तक समिति अपना फैसला ले लेगी।

    दारा सिंह अपनी सजा में रियायत (Remission) और समयपूर्व रिहाई की मांग कर रहा है। उसने अदालत को बताया कि वह 24 वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद है। याचिका में उसने कहा कि अपराध उसने "युवावस्था के आवेश" में किया था और अब उसे अपने कृत्य पर पछतावा है। उसने सुधारात्मक न्याय (Reformative Theory of Punishment) का हवाला देते हुए समाज में एक सुधरे हुए व्यक्ति के रूप में लौटने का अवसर देने की मांग की।

    हालांकि, राज्य सरकार ने बताया कि उसकी रिमिशन नीति के अनुसार जिन कैदियों की मृत्युदंड की सजा आजीवन कारावास में बदली गई है, उनके मामले पर 25 वर्ष की सजा पूरी होने के बाद विचार किया जा सकता है।

    गौरतलब है कि 22 जनवरी 1999 को ओडिशा के केओंझार जिले के मनोहरपुर गांव में दारा सिंह के नेतृत्व में भीड़ ने ऑस्ट्रेलियाई मिशनरी ग्राहम स्टेन्स और उनके दो मासूम बेटों फिलिप (10 वर्ष) तथा टिमोथी (6 वर्ष) को उनकी गाड़ी सहित जिंदा जला दिया था।

    ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2003 में दारा सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में ओडिशा हाईकोर्ट ने 2005 में इसे आजीवन कारावास में बदल दिया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में बरकरार रखा था।

    अब इस मामले में सभी की नजरें ओडिशा राज्य सेंटेंस रिव्यू बोर्ड के फैसले पर टिकी हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 19 अगस्त तक निर्णय लेने की अपेक्षा जताई है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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