आपराधिक रिकॉर्ड छिपाने पर कर्मचारी की बर्खास्तगी अपने आप नहीं हो सकती: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
12 Aug 2026 1:28 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कर्मचारी के आपराधिक रिकॉर्ड का खुलासा होने मात्र से उसकी नौकरी खत्म नहीं की जा सकती। बर्खास्तगी से पहले नियोक्ता को यह जांचना होगा कि कर्मचारी ने जानबूझकर जानकारी छिपाई थी या नहीं और क्या उसकी सेवा जारी रखना वास्तव में संभव नहीं है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने कहा कि बर्खास्तगी के लिए दो स्तर की जांच जरूरी है। पहले यह तय करना होगा कि कर्मचारी को आपराधिक मामले की जानकारी थी और उसने उसे छिपाया या गलत जानकारी दी। इसके बाद अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, कर्मचारी के पद और मामले के परिणाम सहित सभी परिस्थितियों पर विचार करना होगा।
मामले में कर्मचारी ने कहा था कि उसे अपने खिलाफ दर्ज NCR की जानकारी ही नहीं थी। पुलिस रिकॉर्ड में भी उसके खिलाफ मामले में सबूत नहीं मिलने और उसका नाम हटाए जाने की बात सामने आई थी। इसके बावजूद नियोक्ता ने बिना उचित जांच के उसकी सेवा समाप्त कर दी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस तथ्य की जानकारी ही कर्मचारी को नहीं थी, उसे छिपाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए कर्मचारी को सभी परिणामी लाभों के साथ बहाल करने का निर्देश दिया। हालांकि, बकाया वेतन 50% तक सीमित रहेगा और आठ सप्ताह में भुगतान नहीं होने पर 6% वार्षिक ब्याज देना होगा।


