₹41,000 करोड़ धोखाधड़ी रिपोर्ट मामला: कोबरापोस्ट को झटका, अनिल अंबानी को नया मानहानि मुकदमा दायर करने की अनुमति देने वाले आदेश के राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

  • ₹41,000 करोड़ धोखाधड़ी रिपोर्ट मामला: कोबरापोस्ट को झटका, अनिल अंबानी को नया मानहानि मुकदमा दायर करने की अनुमति देने वाले आदेश के राहत से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

    सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को समाचार पोर्टल Cobrapost की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा उद्योगपति अनिल अंबानी को पूर्व में वापस लिए गए मानहानि मुकदमे के स्थान पर नया मुकदमा दायर करने की अनुमति देने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी।

    जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के पास दीवानी कानून के तहत वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं, इसलिए इस स्तर पर हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

    कोबरापोस्ट की ओर से दलील दी गई कि ट्रायल कोर्ट ने उसे सुनवाई का अवसर दिए बिना अनिल अंबानी को उसी कारण-ए-कार्य (cause of action) पर नया मुकदमा दायर करने की स्वतंत्रता दे दी। याचिकाकर्ता का कहना था कि सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 23 के तहत ऐसी अनुमति केवल सीमित परिस्थितियों में ही दी जा सकती है और प्रतिवादी को सुनवाई का अधिकार है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश को वापस लेने (recall) संबंधी कोबरापोस्ट की याचिका पहले से ही दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने कहा कि यदि अनिल अंबानी नया मुकदमा दायर करते हैं, तो कोबरापोस्ट उसके विचारणीय होने (maintainability), क्षेत्राधिकार और अन्य कानूनी आपत्तियां संबंधित सिविल कोर्ट के समक्ष उठा सकता है।

    सुनवाई के दौरान कोबरापोस्ट ने यह भी तर्क दिया कि अनिल अंबानी के मुंबई से गहरे व्यावसायिक और सामाजिक संबंध हैं, इसलिए दिल्ली की अदालत में मुकदमा दायर करना उचित नहीं था। साथ ही, मूल वादपत्र में हर्जाने की राशि भी स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं की गई थी।

    इन दलीलों पर प्रतिक्रिया देते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि यदि नया मुकदमा दायर किया जाता है, तो क्षेत्राधिकार और विचारणीयता से जुड़े सभी प्रश्न पहले संबंधित सिविल कोर्ट द्वारा तय किए जाएंगे।

    पीठ ने हाईकोर्ट को मामले के शीघ्र निस्तारण का निर्देश देने से भी इनकार कर दिया, लेकिन कोबरापोस्ट को यह स्वतंत्रता दी कि वह दिल्ली हाईकोर्ट में शीघ्र सुनवाई के लिए उपयुक्त आवेदन दाखिल कर सकता है।

    गौरतलब है कि यह विवाद कोबरापोस्ट की उन रिपोर्टों से जुड़ा है, जिनमें आरोप लगाया गया था कि अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों ने ₹41,000 करोड़ से अधिक की कथित धोखाधड़ी की है। इन रिपोर्टों के खिलाफ अनिल अंबानी ने मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें उसी कारण-ए-कार्य पर नया मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी थी, जिसके खिलाफ कोबरापोस्ट ने पहले दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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