17 साल पुराने मॉल-होटल को गिराना जनहित के खिलाफ, वित्तीय वसूली से दूर हो सकती है अनियमितता: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

1 Jun 2026 11:41 AM IST

  • 17 साल पुराने मॉल-होटल को गिराना जनहित के खिलाफ, वित्तीय वसूली से दूर हो सकती है अनियमितता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अनियमित तरीके से आवंटित भूमि पर बने 17 साल पुराने शॉपिंग मॉल और होटल को ध्वस्त करना जनहित में नहीं होगा, क्योंकि इससे होने वाला सामाजिक और आर्थिक नुकसान अपूरणीय होगा। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें नवी मुंबई के वाशी स्थित भूखंड को खाली कर सीआईडीसीओ को वापस सौंपने का निर्देश दिया गया था।

    अदालत ने कहा कि 450 करोड़ रुपये के निवेश से बना यह व्यावसायिक परिसर करीब 8,000 लोगों को रोजगार देता है और प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ रुपये का कर राजस्व उत्पन्न करता है। ऐसे में ध्वस्तीकरण की बजाय वित्तीय वसूली अधिक उपयुक्त उपाय है।

    मामला वर्ष 2003 में सीआईडीसीओ द्वारा के. रहेजा कॉर्प को भूमि आवंटन से जुड़ा था, जिसे बाद में अवैध पाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने नियमितीकरण के लिए कंपनी को 2014 की रेडी रेकनर दर के आधार पर ब्याज सहित 318.31 करोड़ रुपये तथा अतिरिक्त 1 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया। निर्धारित राशि चार माह में जमा होने पर आवंटन नियमित माना जाएगा।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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