कैंसर को Notifiable Disease घोषित करने पर सुप्रीम कोर्ट का जोर, राज्यों को विचार करने का निर्देश
Praveen Mishra
11 Aug 2026 4:37 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कैंसर को Notifiable Disease घोषित करने पर विचार करने का निर्देश दिया, जिन्होंने अभी तक ऐसा नहीं किया है। कोर्ट ने कैंसर के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के लिए देशभर में एक समान नीति की जरूरत पर जोर दिया।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ कैंसर को पूरे देश में Notifiable Disease घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान CJI ने केंद्र से पूछा कि सभी राज्यों और UTs के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी कर देशभर में एकरूपता क्यों नहीं लाई जा सकती। केंद्र की ओर से Additional Solicitor General अनिल कौशिक ने बताया कि स्वास्थ्य राज्य का विषय है और 17 राज्यों/UTs में कैंसर को पहले ही Notifiable Disease घोषित किया जा चुका है।
कोर्ट ने बाकी राज्यों और UTs को संसदीय स्थायी समिति की 139वीं रिपोर्ट की सिफारिशों पर विचार कर उचित निर्णय लेने और Compliance Affidavit दाखिल करने का निर्देश दिया।
क्यों जरूरी है कैंसर की अनिवार्य रिपोर्टिंग?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी 139वीं रिपोर्ट में कैंसर को Notifiable Disease घोषित करने की सिफारिश की थी। समिति ने कहा था कि अनिवार्य रिपोर्टिंग नहीं होने से कैंसर से होने वाली मौतों की वास्तविक संख्या कम दर्ज हो सकती है।
समिति के अनुसार, कई मामलों में मृत्यु का वास्तविक कारण दर्ज करने के बजाय कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर जैसे कारण दर्ज कर दिए जाते हैं।
कैंसर की अनिवार्य रिपोर्टिंग से देश में कैंसर के मामलों और मौतों का बेहतर डेटाबेस तैयार हो सकेगा। इससे कैंसर की incidence और prevalence को समझने, risk factors का विश्लेषण करने, screening programmes तैयार करने और स्वास्थ्य संसाधनों के बेहतर आवंटन में मदद मिल सकती है।
समिति ने कैंसर रजिस्ट्रेशन और real-time data collection के लिए CoWIN जैसे पोर्टल की स्थापना की भी सिफारिश की थी।
Notifiable Disease का अर्थ ऐसी बीमारी से है, जिसके मामलों की जानकारी स्वास्थ्य संस्थानों या निर्धारित संस्थाओं को सरकारी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से देनी होती है।


