जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

29 April 2026 11:32 AM IST

  • जाली वसीयत पर आधारित संपत्ति खरीदने वाला खरीदार आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी जाली वसीयत (Will) के आधार पर खरीदी गई संपत्ति के मामले में, यदि खरीदार को उस जालसाजी की जानकारी नहीं थी, तो उसे आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब खरीद के समय खरीदार को कथित फर्जी वसीयत की जानकारी नहीं थी और वह संबंधित अवधि में विदेश में था, तो उसे धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

    अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में खरीदार स्वयं पीड़ित होता है, क्योंकि उसकी संपत्ति का स्वामित्व ही विवादित हो जाता है, यदि विक्रेता ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर बिक्री की हो।

    यह मामला तमिलनाडु में पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ा है, जहां शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके पिता की 1988 की कथित वसीयत जाली थी। इसी वसीयत के आधार पर 1998 में संपत्ति को कई खरीदारों को बेच दिया गया, जिनमें अपीलकर्ता भी शामिल था।

    बाद में जालसाजी, धोखाधड़ी और साजिश के आरोपों में मामला दर्ज किया गया। अपीलकर्ता ने यह कहते हुए कार्यवाही रद्द करने की मांग की कि वह एक bona fide खरीदार है और वसीयत की जालसाजी में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

    कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर कि संपत्ति का सौदा बाद में जाली दस्तावेज पर आधारित पाया गया, खरीदार को स्वतः आपराधिक आरोपी नहीं बनाया जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि खरीदार को जालसाजी की जानकारी थी या वह साजिश में शामिल था, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं हो सकती।

    अदालत ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता और खरीदार के बीच कोई प्रत्यक्ष अनुबंध (privity of contract) नहीं था, इसलिए तीसरा पक्ष खरीदार पर धोखाधड़ी का आरोप नहीं लगा सकता।

    इसी के साथ, कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए खरीदार के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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