बांके बिहारी मंदिर में पारंपरिक पूजा व्यवस्था बहाल करने और भीड़ प्रबंधन सुधारने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
Praveen Mishra
26 May 2026 5:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन को पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों को बहाल करने और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने गोस्वामियों के दो समूहों—शयन भोग और राज भोग—से दो-दो प्रतिनिधियों को समिति में शामिल करने की अनुमति दी, ताकि वे मंदिर के दैनिक संचालन और धार्मिक परंपराओं को लेकर सुझाव दे सकें।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि समिति इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष मंदिर प्रबंधन के लिए पूर्व इलाहाबाद हाईकोर्ट जज जस्टिस अशोक कुमार की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए विस्तृत योजना तैयार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि मंदिर के आसपास की संकरी गलियां और बढ़ती भीड़ गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय हैं और इसके लिए आधुनिक तकनीक आधारित भीड़ नियंत्रण प्रणाली की जरूरत है।
कोर्ट ने कहा कि विकास योजना में सड़क चौड़ीकरण, अस्पताल, पीने के पानी की व्यवस्था, शौचालय, होटल, इमरजेंसी एग्जिट, सार्वजनिक परिवहन और वरिष्ठ नागरिकों के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी सुविधाएं शामिल होनी चाहिए।
सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने गोस्वामियों की ओर से दलील दी कि मंदिर की पारंपरिक पूजा पद्धति और समय में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ रस्में सदियों पुरानी परंपराओं का हिस्सा हैं और प्रशासनिक सुविधा के नाम पर उन्हें बदला नहीं जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को बहाल किया जा सकता है, बशर्ते श्रद्धालुओं का शोषण न हो और किसी विशेष वर्ग को अनुचित लाभ न मिले। मुख्य न्यायाधीश ने मंदिर परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने और श्रद्धालुओं में नागरिक अनुशासन की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

