सुप्रीम कोर्ट ने AIMIM विधायक की चुनावी जीत के खिलाफ याचिका खारिज की, 'दुआ' को वोट मांगना नहीं माना
Praveen Mishra
25 Sept 2026 4:14 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मालेगांव सेंट्रल से AIMIM उम्मीदवार मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल अब्दुल खलीक के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें उनके चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की गई थी।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार शान-ए-हिंद निहाल अहमद की अपील खारिज की।
'दुआ' को वोट मांगना नहीं माना
चुनावी विवाद में आरोप लगाया गया था कि चुनाव प्रचार के दौरान मुफ्ती इस्माइल ने राजनीतिक और धार्मिक सभाओं में अपनी चुनावी जीत के लिए 'दुआ' की थी, जिस पर मौजूद लोगों ने 'आमीन' कहा।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह धर्म के आधार पर वोट मांगने और Representation of the People Act, 1951 की धारा 123 के तहत corrupt practice के बराबर है।
हालांकि, बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा था कि चुनावी जीत के लिए दुआ करना अपने-आप में धर्म के आधार पर वोट मांगना या undue influence नहीं है। 'आमीन' कहना दुआ से सहमति जताना हो सकता है, लेकिन इसे किसी उम्मीदवार को वोट देने की औपचारिक प्रतिज्ञा नहीं माना जा सकता।
162 वोटों से जीते थे मुफ्ती इस्माइल
मुफ्ती इस्माइल ने मालेगांव सेंट्रल सीट पर 1,09,653 वोट हासिल किए थे, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी शेख आसिफ शेख राशिद को 1,09,491 वोट मिले थे। जीत का अंतर केवल 162 वोट था।
शान-ए-हिंद निहाल अहमद को 9,624 वोट मिले थे।
धार्मिक संगठनों के समर्थन पर भी हाईकोर्ट की टिप्पणी
चुनौती में धार्मिक संगठनों द्वारा मुफ्ती इस्माइल की उम्मीदवारी के समर्थन का मुद्दा भी उठाया गया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि राजनीतिक विमर्श में धर्म का संदर्भ पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है और धार्मिक संगठनों के चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के चुनावी भाषणों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी हाईकोर्ट ने कहा था कि उन्हें चुनावी अभियान के दौरान लगे आरोप-प्रत्यारोप के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
पर्चों को लेकर भी आरोप
मामले में मुफ्ती इस्माइल की बहन रफीआ खलीक द्वारा कथित तौर पर बांटे गए पर्चों का मुद्दा भी उठाया गया था। आरोप था कि इनमें महिलाओं के चुनाव लड़ने और मुस्लिम महिलाओं के व्यवहार को लेकर धार्मिक निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट ने माना कि ऐसे विचारों की आलोचना की जा सकती है, लेकिन पर्चे में किसी विशेष उम्मीदवार का उल्लेख नहीं था। इसलिए कोर्ट ने इसे RPA की धारा 123(3) या 123(4) के तहत corrupt practice नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद मालेगांव सेंट्रल से मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल का चुनाव बरकरार है।

