वैधानिक अपीलें विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के साथ ही दायर की जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
21 March 2026 8:56 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने फिर दोहराया कि विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी के बिना किसी भी वैधानिक अपील पर विचार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल के एक फैसले के खिलाफ सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा दायर सिविल अपील की सुनवाई कर रही थी।
कोर्ट ने गौर किया कि अपीलकर्ता ने अर्जी दायर कर विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी जमा करने से छूट मांगी थी। कोर्ट ने पाया कि अपील को दोबारा दायर करने में 102 दिनों की देरी हुई। फिर भी छूट वाली अर्जी में यह नहीं बताया गया कि सर्टिफाइड कॉपी हासिल करने के लिए कोई कदम उठाया गया या नहीं।
बता दें, बेंच ने सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के आदेश XIX नियम 40 का हवाला दिया और साफ तौर पर कहा कि जिस फैसले को चुनौती दी गई, उसकी सर्टिफाइड कॉपी के बिना किसी भी वैधानिक अपील पर विचार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने रजिस्ट्री को यह भी निर्देश दिया कि वैधानिक अपीलों की जांच करते समय देरी के पहलू पर भी ध्यान दिया जाए, क्योंकि ये अपीलें तय समय सीमा के भीतर ही दायर की जानी चाहिए।
इस मामले में दिए गए निर्देश के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कल एक सर्कुलर जारी कर यह साफ किया कि वैधानिक अपीलों पर तब तक विचार नहीं किया जाएगा, जब तक उनके साथ विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी न लगी हो।
"सिविल अपील D.No. 57050 of 2025, जिसका टाइटल 'सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया बनाम बिजेंद्र कुमार झा और अन्य' है और जिसकी तारीख 27.02.2026 है, में जारी निर्देशों के पालन में सभी संबंधित पक्षों को सूचित किया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के आदेश XIX नियम 3 (2) और 40 को एक साथ पढ़ने पर यह स्पष्ट है कि किसी भी वैधानिक अपील पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता, जब तक उसके साथ विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी न लगी हो। इसलिए अब से ऐसे सभी मामलों को आगे बढ़ाने के लिए सभी वैधानिक अपीलों के साथ विवादित फैसले की सर्टिफाइड कॉपी संलग्न करना अनिवार्य होगा।"
Case : Central Bank of India v. Bijendra Kumar Jha & Others,

