SHANTI Act पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी : 'परमाणु दुर्घटना में मुआवजा तय करने की अदालत की शक्ति सीमित नहीं हो सकती'
Praveen Mishra
19 May 2026 5:12 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को SHANTI Act, 2025 (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act) की वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह “संवेदनशील विधायी नीति” (Sensitive Legislative Policy Issue) से जुड़ा मामला है और अदालत फिलहाल इसमें हस्तक्षेप करने से हिचक रही है।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि परमाणु दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा देने की न्यायालय की शक्ति सीमित नहीं की जा सकती।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें SHANTI Act के उन प्रावधानों को चुनौती दी गई है जो निजी परमाणु ऑपरेटरों और सरकार की देनदारी (Liability) को सीमित करते हैं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कानून के तहत परमाणु दुर्घटना की कुल देनदारी ₹4000 करोड़ से कम तय की गई है, जबकि चेर्नोबिल और फुकुशिमा जैसी दुर्घटनाओं में नुकसान इससे कई गुना अधिक हुआ था।
भूषण ने यह भी कहा कि कानून में परमाणु उपकरण आपूर्तिकर्ताओं (Suppliers) को लगभग जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है, जिससे सुरक्षा मानकों में लापरवाही बढ़ सकती है।
उन्होंने 1986 के श्रीराम ओलियम गैस रिसाव मामले का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने खतरनाक गतिविधियों के लिए “पूर्ण दायित्व” (Absolute Liability) का सिद्धांत स्थापित किया था और सरकार नीति के नाम पर नागरिकों के अनुच्छेद 21 के अधिकारों से समझौता नहीं कर सकती।
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि संसद निवेशकों को सीमित देनदारी का आश्वासन दे सकती है, लेकिन इससे अदालतों की मुआवजा तय करने की संवैधानिक शक्ति समाप्त नहीं होती।
उन्होंने कहा कि अदालत की प्राथमिक चिंता यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों के लिए मजबूत और प्रभावी मुआवजा तंत्र मौजूद हो।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की कुछ आशंकाओं को स्पष्ट करने का प्रयास करेगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।
याचिका में परमाणु नियामक संस्था AERB की स्वतंत्रता, निजी भागीदारी पर रोक और परमाणु कचरे के सुरक्षित निस्तारण के लिए वैज्ञानिक तंत्र स्थापित करने की मांग भी की गई है।

