S.101(2) JJ Act | JJB के आदेश के खिलाफ अपील की सुनवाई में चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेना ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
9 Aug 2026 10:02 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ़ किया कि कानून के दायरे में आए बच्चे (Child in Conflict with Law) की शुरुआती जांच (Preliminary Assessment) करते समय चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट एक्सपर्ट की मदद लेने का नियम, जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 की धारा 101(2) पर उसी तरह लागू नहीं होगा।
धारा 15(1) के प्रावधान के अनुसार, जब यह तय किया जा रहा हो कि कानून के दायरे में आए बच्चे पर बालिग की तरह मुकदमा चलाया जाए या नहीं तो बोर्ड के लिए चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की एक्सपर्ट मदद लेना ज़रूरी है, बशर्ते बोर्ड में चाइल्ड साइकोलॉजी या चाइल्ड साइकियाट्री में डिग्री वाला कोई प्रोफेशनल शामिल न हो (जैसा कि बरुण चंद्र ठाकुर बनाम भोलू, 2022 LiveLaw (SC) 593 मामले में कहा गया)।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच ने अब साफ़ किया कि JJ Act की धारा 101 के तहत सेशन कोर्ट द्वारा अपील की सुनवाई करते समय चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट की मदद लेने का नियम लागू नहीं होगा।
प्रावधान का शाब्दिक अर्थ निकालते हुए कोर्ट ने कहा,
"सेशन कोर्ट/अपीलेट कोर्ट की एकमात्र ज़िम्मेदारी यह जांचना है कि क्या हर मामले के तथ्यों के अनुसार ऐसी परिस्थितियां मौजूद हैं जिनके लिए उस शक्ति का इस्तेमाल ज़रूरी है।"
कोर्ट ने कहा,
"ऊपर की चर्चा का कुल नतीजा यह है कि धारा 101(2) अपीलेट कोर्ट को एक्सपर्ट्स की मदद लेने की शक्ति देती है, जिसका इस्तेमाल कोर्ट की मर्जी पर निर्भर करता है और हर मामले के तथ्यों पर ऊपर चर्चा किए गए कारकों को तौलकर इसका आकलन किया जाता है। बेहतर ढंग से समझने के लिए एक उदाहरण लें: अगर बोर्ड शुरुआती जांच करते समय एक्सपर्ट्स की मदद लेने में नाकाम रहा है तो कोर्ट अपने सामने मौजूद तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए एक्सपर्ट्स की मदद ले सकता है। ऐसी स्थितियों में कोर्ट का फ़ैसला फिर से एक्ट से तय होगा, खासकर बच्चे के सर्वोत्तम हित के सिद्धांत और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन में समय की संवेदनशीलता से।"
Case Title: X v. State of Bihar & Anr.
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