105 वर्षीय उम्रकैदी को सुप्रीम कोर्ट ने दी समय से पहले रिहाई, 1988 के हत्या मामले में था दोषी

Praveen Mishra

21 Aug 2026 5:21 PM IST

  • 105 वर्षीय उम्रकैदी को सुप्रीम कोर्ट ने दी समय से पहले रिहाई, 1988 के हत्या मामले में था दोषी

    सुप्रीम कोर्ट ने आज 105 वर्षीय उम्रकैदी रसीक चंद्र मंडल को समय से पहले रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने 1988 के हत्या मामले में उन्हें दी गई अंतरिम जमानत/पैरोल को बरकरार रखते हुए उनकी Premature Release का निर्देश दिया।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

    1988 में हत्या के मामले में हुई थी गिरफ्तारी

    मंडल के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ने वर्ष 1988 में IPC की धारा 143, 448, 302 और 324 के तहत मामला दर्ज किया था। बाद में 12 दिसंबर 1994 को उन्हें IPC की धारा 302 के तहत हत्या के अपराध में दोषी ठहराया गया।

    उन्होंने दोषसिद्धि के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन वर्ष 2018 में उनकी अपील खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां भी उनकी याचिका खारिज हो गई।

    99 साल की उम्र में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे

    मंडल ने वर्ष 2020 में, जब उनकी उम्र 99 वर्ष थी, समय से पहले रिहाई की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

    वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत/पैरोल प्रदान की थी। कोर्ट ने उनकी रिहाई के लिए आवश्यक नियम और शर्तें तय करने का अधिकार ट्रायल कोर्ट को दिया था।

    105 साल की उम्र को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला

    अब मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंडल की 105 वर्ष की उम्र को ध्यान में रखा। पीठ ने कहा कि भले ही उन्होंने अपनी पूरी सजा की अवधि पूरी न की हो, लेकिन उनकी वर्तमान उम्र को देखते हुए उन्हें समय से पहले रिहा न करने का कोई औचित्य नहीं है।

    इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी Premature Release का आदेश पारित कर दिया।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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