कम गंभीर अपराधों में सज़ा के बाद हुए समझौते के आधार पर कानूनी कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
1 Sept 2026 9:03 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कम गंभीर अपराधों में आरोपी और शिकायतकर्ता/पीड़ित के बीच सज़ा के बाद हुए समझौते के आधार पर आरोपी के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही रद्द की जा सकती है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले में दखल देने से इनकार किया, जिसमें आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की गई। आरोपी को गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने, अपहरण/अगवा करने और खतरनाक हथियारों के इस्तेमाल जैसे अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया।
ट्रायल कोर्ट के सामने प्रतिवादी-आरोपी को दोषी ठहराए जाने के बाद शिकायतकर्ता/पीड़ित ने बयान दिया कि सम्मानित लोगों और रिश्तेदारों की मदद से समझौता हुआ। यह समझौता बिना किसी दबाव या अनुचित प्रभाव के, पूरी तरह से अपनी मर्जी से किया गया।
कोर्ट ने 'ज्ञान सिंह बनाम पंजाब राज्य' (2012) के अपने फैसले और बाद में 'रामगोपाल और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य' (2021) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के पास उन मामलों में भी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की शक्ति है, जो 'कंपाउंडेबल' (समझौता-योग्य) नहीं हैं, बशर्ते पक्षों ने आपस में मामला सुलझा लिया हो।
हालांकि, 'रामगोपाल' मामले में कोर्ट ने सावधानी बरतने की बात कही कि ऐसी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल आम तौर पर नहीं, बल्कि सोच-समझकर और इन बातों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए:
1. अपराध की प्रकृति और समाज की अंतरात्मा पर उसका असर।
2. चोट की गंभीरता (यदि कोई हो)।
3. आरोपी और पीड़ित के बीच समझौते की स्वैच्छिक प्रकृति।
4. कथित अपराध होने से पहले और बाद में आरोपी का व्यवहार और/या अन्य संबंधित बातें।
कानून को लागू करते हुए कोर्ट ने पाया कि चूंकि इसमें शामिल अपराधों का आम जनता पर कोई असर नहीं था और न ही वे बहुत गंभीर अपराध थे, इसलिए हाईकोर्ट के उस फैसले को सही ठहराया गया, जिसमें प्रतिवादी-आरोपी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी गई।
कोर्ट ने कहा,
“हमने इस कोर्ट के सामने रखी गई सामग्री को देखा और पाया कि यह घटना कुछ व्यक्तियों के बीच हुई। यह न तो कोई बहुत गंभीर अपराध का मामला है और न ही इसमें कोई आर्थिक अपराध NDPS Act के तहत प्रतिबंधित सामान का लेन-देन या करोड़ों रुपये का कोई ऐसा घोटाला शामिल है, जिससे आम जनता प्रभावित हुई हो।”
नतीजतन, राज्य की अपील खारिज की गई।
Cause Title: THE STATE OF PUNJAB VERSUS AVTAR SINGH & ORS.


