पुलिस शिकायत वाले मामलों में आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं कर सकती, जब तक समन के साथ-साथ गैर-जमानती वारंट जारी न हो जाए: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
24 April 2026 11:02 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (23 अप्रैल) को बिहार और झारखंड में गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितता की ओर ध्यान दिलाया। कोर्ट ने पाया कि शिकायत वाले मामलों में मुकदमेबाज़ इस आशंका से सेशंस कोर्ट / हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत के लिए जाते हैं कि केवल प्रक्रिया (process) जारी होने से ही उनकी गिरफ्तारी हो जाएगी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बार प्रक्रिया जारी हो जाने के बाद मुकदमेबाज़ को केवल उस प्रक्रिया का पालन करना होता है, क्योंकि शिकायत वाले मामले में तब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकती, जब तक प्रक्रिया को लागू करने के लिए गैर-जमानती वारंट जारी न किया गया हो।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने टिप्पणी की,
"एक बार जब कोर्ट संज्ञान ले लेता है और समन जारी कर देता है तो आरोपी को बस इतना करना होता है कि वह उस कोर्ट के सामने पेश हो और कार्यवाही में शामिल हो। आरोपी को सेशंस कोर्ट या हाईकोर्ट (जैसा भी मामला हो) में जाकर अग्रिम ज़मानत की गुहार क्यों लगानी चाहिए? शिकायत वाले मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने की पुलिस के पास कोई शक्ति नहीं होती, जब तक कि उस कोर्ट द्वारा समन के साथ-साथ गैर-जमानती वारंट जारी न किया गया हो।"
खंडपीठ ने यह टिप्पणी झारखंड हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ दायर एक अपील की सुनवाई करते हुए की। झारखंड हाईकोर्ट ने न केवल शिकायत वाले मामले में अग्रिम ज़मानत याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार किया और फिर खारिज किया, बल्कि अपीलकर्ता को ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश भी दिया; जिसके परिणामस्वरूप आरोपी व्यक्ति ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट के उस निर्देश को अस्वीकृत करते हुए, जिसमें अपीलकर्ता को शिकायत वाले मामले में ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करके नियमित ज़मानत मांगने के लिए कहा गया था, कोर्ट ने चिंता व्यक्त की कि इस तरह के दृष्टिकोण के कारण उसके सामने अनावश्यक अपीलें आ रही हैं। कोर्ट ने इसका कारण हाई कोर्ट द्वारा कानून के गलत अनुप्रयोग को बताया।
Cause Title: OM PRAKASH CHHAWNIKA @ OM PRAKASH CHABNIKA @ OM PRAKASH CHAWNIKA VERSUS THE STATE OF JHARKHAND & ANR.

