बीमा कंपनी के ऑफिस की जगह से मोटर दुर्घटना के दावे के लिए अधिकार क्षेत्र तय नहीं होता: सुप्रीम कोर्ट ने MV Act की धारा 166(2) की व्याख्या की
Shahadat
16 Sept 2026 6:02 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हालांकि मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166(2) दावेदार को उस जगह पर मुआवज़े का दावा दायर करने की अनुमति देती है, जहां वह खुद "कारोबार करता है," लेकिन यही बात बीमा कंपनी पर लागू नहीं होती। सिर्फ़ इसलिए कि बीमा कंपनी किसी जगह पर कारोबार करती है, उसे उस जगह पर केस चलाने के अधिकार क्षेत्र (टेरिटोरियल ज्यूरिस्डिक्शन) के मकसद से प्रतिवादी (डिफेंडेंट) नहीं माना जा सकता।
जस्टिस उज्ज्वल भुयान और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की बेंच ने दावेदार की अपील खारिज करते हुए यह बात कही।
बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का वह आदेश बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT), चेन्नई के पास उसके दावे की याचिका पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, क्योंकि न तो दुर्घटना और न ही उसका निवास स्थान इसके अधिकार क्षेत्र में आता है।
अपीलकर्ता (दावेदार) ने MACT चेन्नई के सामने MV Act की धारा 166 के तहत दावा याचिका दायर की। बीमा कंपनी (प्रतिवादी) ने धारा 166(2) के तहत MACT के अधिकार क्षेत्र पर आपत्ति जताई और तर्क दिया कि चेन्नई में घटना का कोई भी हिस्सा नहीं हुआ।
हालांकि, MACT ने आपत्ति खारिज कर दी और कहा कि चूंकि बीमा कंपनी का चेन्नई में भी एक बिज़नेस ऑफिस है, इसलिए उसके पास अधिकार क्षेत्र की कमी नहीं है। इसके बाद बीमा कंपनी ने संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत मद्रास हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि चूंकि दुर्घटना चित्तूर में हुई थी, इसलिए केवल MACT, चित्तूर के पास ही अधिकार क्षेत्र है।
मद्रास हाईकोर्ट के इसी फैसले से असंतुष्ट होकर दावेदार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
Case: K Rashik v National Insurance Company Ltd & Anr


