मूल बिक्री समझौता पंजीकृत नहीं है तो बाद के दस्तावेज़ का पंजीकरण भी स्वामित्व नहीं देगा: सुप्रीम कोर्ट

  • मूल बिक्री समझौता पंजीकृत नहीं है तो बाद के दस्तावेज़ का पंजीकरण भी स्वामित्व नहीं देगा: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि जब मूल बिक्री समझौता अपंजीकृत रहा, तो इसका परिणाम केवल इस आधार पर वैध टाइटल नहीं हो सकता है कि उक्त अपंजीकृत बिक्री विलेख के आधार पर बाद में लेनदेन पंजीकृत किया गया था।

    जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने उस मामले की सुनवाई की जहां प्रतिवादी ने 1982 के बिक्री समझौते ("मूल समझौते") के आधार पर स्वामित्व और बेदखली से सुरक्षा का दावा किया था, जिसे पंजीकरण अधिनियम के तहत अनिवार्य रूप से कभी पंजीकृत नहीं किया गया था। बाद में, मूल समझौते को 2006 में सहायक रजिस्ट्रार द्वारा मान्य होने का दावा किया गया था।

    1982 के बिक्री समझौते के आधार पर प्रतिवादी को बेदखली से संरक्षण प्रदान करने वाले उच्च न्यायालय के फैसले को रद्द करते हुए, न्यायमूर्ति चंद्रन द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया है कि 1982 के बिक्री समझौते के गैर-पंजीकरण के दोष को 2006 में नए लेनदेन में लिए बिना इसके सत्यापन पर ठीक नहीं किया जा सकता है।

    न्यायालय ने कहा कि पंजीकरण अधिनियम की धारा 23 इसके निष्पादन की तारीख से पंजीकरण के लिए एक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए चार महीने का समय निर्धारित करती है। धारा 34 का परंतुक रजिस्ट्रार को देरी को माफ करने में भी सक्षम बनाता है, यदि जुर्माना के भुगतान पर दस्तावेज चार महीने की अतिरिक्त अवधि के भीतर प्रस्तुत किया जाता है।

    इस संदर्भ में, न्यायालय ने कहा, "1982 का समझौता, मूल एक और पुनर्वैध, एक वैध टाइटल में परिणाम नहीं दे सकता है, केवल इस कारण से कि बाद के उपकरण को पंजीकृत किया गया था।

    नतीजतन, न्यायालय ने पाया कि हाईकोर्ट ने बेचने के लिए अपंजीकृत समझौते के आधार पर प्रतिवादी को सुरक्षा प्रदान करने में गलती की।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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