नगर सीमा निर्धारण का विवाद सिविल कोर्ट नहीं तय कर सकता: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
23 April 2026 1:44 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि नगर सीमा (Municipal Limits) के निर्धारण से जुड़े विवादों पर सिविल कोर्ट सुनवाई नहीं कर सकते, क्योंकि यह विषय संबंधित कानूनों के तहत तय किया जाता है और विधायी क्षेत्राधिकार में आता है।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए यह स्पष्ट किया।
मामला क्या है?
यह मामला महाराष्ट्र के कोल्हापुर से जुड़ा है, जहां 2013 में नगर निगम ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी कर दावा किया कि उचगांव गांव की कुछ जमीनें नगर निगम की सीमा में आती हैं और वहां अवैध निर्माण पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
ग्राम पंचायत ने इस दावे का विरोध करते हुए कहा कि ये जमीनें उसके अधिकार क्षेत्र में आती हैं और उसने वैध रूप से निर्माण की अनुमति दी है।
कानूनी विवाद
ग्राम पंचायत ने सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर घोषणा (declaration) और रोक (injunction) की मांग की।
ट्रायल कोर्ट ने प्रारंभ में अपने अधिकार क्षेत्र को सही मानते हुए अंतरिम राहत दी
लेकिन अपीलीय अदालतों और बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
अदालत ने कहा—
नगर सीमा का निर्धारण एक विधायी (legislative) कार्य है
ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है
केवल तथ्यात्मक विवाद होने से सिविल कोर्ट को अधिकार नहीं मिल जाता
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विवाद में किसी वैधानिक निर्णय की वैधता या प्रभाव की जांच शामिल है, तो उसे सिविल कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती।
अदालत की अहम टिप्पणी
“सिर्फ विवादित तथ्य होने से सिविल कोर्ट को अधिकार नहीं मिल जाता, यदि विषय ही उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर हो।”
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने ग्राम पंचायत की अपील खारिज कर दी और अंतरिम रोक हटा दी।

