Motor Vehicle Act | फैक्ट्रियों के अंदर इस्तेमाल होने वाले एक्सकेवेटर, डंपर वगैरह मोटर वाहन नहीं, इसलिए उन पर रोड टैक्स नहीं लगेगा: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
9 Jan 2026 6:53 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी (HEMM) और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट जैसे एक्सकेवेटर, डंपर, लोडर और डोजर, जिनका इस्तेमाल सिर्फ़ फैक्ट्री या बंद जगह के अंदर होता है, मोटर वाहन अधिनियम की धारा 2(28) के तहत "मोटर वाहन" नहीं हैं और इसलिए उन पर रोड टैक्स नहीं लगेगा।
अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड की याचिका को मंज़ूर करते हुए जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने गुजरात हाईकोर्टा का फैसला रद्द कर दिया, जिसने ऐसी मशीनरी पर करोड़ों रुपये के रोड टैक्स की राज्य की मांग को सही ठहराया, जबकि ये HEMM अल्ट्राटेक के प्लांट साइट्स के ऑपरेशन को आसान बनाने के लिए बंद जगहों पर इस्तेमाल किए जा रहे थे।
कोर्ट ने कहा,
“हम इस पक्के नतीजे पर पहुंचे हैं कि याचिकाकर्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले वाहन खास तरह के वाहन हैं, खासकर कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट वाहन जो औद्योगिक क्षेत्र/फैक्ट्री परिसर/निर्धारित बंद जगहों के अंदर ऑपरेशन और इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हैं और सड़कों या सार्वजनिक सड़कों पर इस्तेमाल के लिए नहीं हैं। ये ऑफ-रोड इक्विपमेंट हैं। इस तरह न केवल अधिनियम की धारा 2 (28) के तहत परिभाषित "मोटर वाहन" के दायरे से बाहर हैं, बल्कि टैक्स से भी बाहर हैं, क्योंकि संविधान की सातवीं अनुसूची की सूची II की एंट्री 57 केवल सड़कों पर इस्तेमाल के लिए उपयुक्त वाहनों पर ही टैक्स लगाने का अधिकार देती है। गुजरात टैक्स अधिनियम की धारा 3 (1) की अनुसूची I के अनुसार भी उन पर रोड टैक्स नहीं लगाया जा सकता है, जो इस तरह के वाहनों यानी कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट वाहनों के लिए कोई टैक्स निर्धारित नहीं करती है।”
विवाद तब शुरू हुआ, जब गुजरात परिवहन विभाग ने 1999 के प्रेस विज्ञापन का हवाला देते हुए मांग की कि अल्ट्राटेक सीमेंट कच्छ और राजकोट में अपने सीमेंट प्लांट के अंदर इस्तेमाल होने वाले अपने डंपर, लोडर, एक्सकेवेटर, सरफेस माइनर और रॉक ब्रेकर को मोटर वाहन के रूप में रजिस्टर करवाए और गुजरात मोटर वाहन टैक्स अधिनियम, 1958 के तहत रोड टैक्स का भुगतान करे। ब्याज और जुर्माने के साथ यह मांग 1999 से आगे की अवधि के लिए लगभग ₹1.36 करोड़ थी।
अल्ट्राटेक ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि इन मशीनों का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक सड़कों पर नहीं किया गया। उन्हें ट्रेलर पर नॉक-डाउन हालत में प्लांट साइट्स पर ले जाया गया और उनका संचालन केवल बंद औद्योगिक परिसरों के अंदर ही किया जाता था। कंपनी ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया जैसे मैन्युफैक्चरर्स से सर्टिफिकेट जमा किए, जिससे यह कन्फर्म हुआ कि ये ऑफ-रोड इक्विपमेंट थे जिनके लिए कोई रोड-वर्थीनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया।
गुजरात हाईकोर्ट ने 2011 में अल्ट्राटेक की याचिका यह मानते हुए खारिज की कि मशीनरी "मोटर वाहन" थी और इसलिए टैक्सेबल थी। कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
विवादित आदेश रद्द करते हुए जस्टिस मित्तल द्वारा लिखे गए फैसले में HEMM को "विशेष प्रकार के वाहन" के रूप में कैटेगराइज़ किया गया, जिन्हें ऑफ-रोड इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया और जो "मोटर वाहन" की परिभाषा में एक एक्सक्लूजनरी क्लॉज़ के दायरे में आते थे।
कोर्ट ने ताराचंद लॉजिस्टिक सॉल्यूशंस लिमिटेड बनाम स्टेट ऑफ आंध्र प्रदेश एंड अन्य, 2025 LiveLaw (SC) 852 में अपने लेटेस्ट फैसले का हवाला देते हुए कहा,
"अगर किसी मोटर वाहन का इस्तेमाल सार्वजनिक जगह पर नहीं किया जाता है या उसे सार्वजनिक जगह पर इस्तेमाल के लिए नहीं रखा जाता है। संबंधित व्यक्ति सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से कोई फायदा नहीं उठा रहा है तो उस पर मोटर वाहन टैक्स का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।"
तदनुसार, अपील स्वीकार कर ली गई और रोड टैक्स की मांग रद्द कर दी गई।
साथ ही यह भी कहा गया,
"अगर इस तरह के किसी भी वाहन को सड़कों पर इस्तेमाल करते हुए पाया जाता है तो वे एक्ट की धारा 2 (28) और गुजरात टैक्स एक्ट की धारा 3 के प्रावधानों से मुक्त नहीं होंगे और कानून के अनुसार ज़ब्ती और जुर्माने की कार्यवाही के अधीन भी हो सकते हैं।"
Cause Title: ULTRATECH CEMENT LTD. VERSUS THE STATE OF GUJARAT & ORS.

