हेड-ऑन टक्कर में बिना गहन जांच के एक ड्राइवर को अकेले दोषी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
Praveen Mishra
29 April 2026 2:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि हेड-ऑन (आमने-सामने) टक्कर के मामलों में बिना सभी परिस्थितियों और पक्षों के आचरण की गहन जांच किए, किसी एक ड्राइवर पर पूरा दोष नहीं डाला जा सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों को रद्द कर दिया। दोनों ने मृत कार चालक को दुर्घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया था।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि निचली अदालतों ने 'सह-लापरवाही' (contributory negligence) और बस चालक के ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर उचित विचार नहीं किया। इसके चलते मामले को दोबारा सुनवाई के लिए MACT को भेज दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि आमने-सामने की टक्कर में एक पक्ष की पूरी तरह से लापरवाही को नकार देना, बिना दूसरे पक्ष की भूमिका की जांच किए, न्यायसंगत नहीं है। “इस तरह के मामलों में ड्राइविंग का तरीका, टक्कर का बिंदु और अन्य परिस्थितियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण जरूरी है,” अदालत ने कहा।
मामला एक ट्रक और कार की टक्कर से जुड़ा था, जिसमें हरिओम और शेर सिंह की मौत हो गई थी। मृतकों के परिजनों ने मुआवजे के लिए अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें MACT ने खारिज कर दिया था। अधिकरण ने माना था कि दुर्घटना केवल हरिओम की लापरवाही के कारण हुई।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि बस चालक (प्रतिवादी) को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया, जबकि उसने खुद गवाही भी नहीं दी थी। इसके अलावा, अधिकरण ने यह मुद्दा उठाया था कि चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस था या नहीं, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट निष्कर्ष नहीं दिया।
कोर्ट ने कहा कि ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता का सवाल केवल बीमा और जिम्मेदारी तय करने के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मामले के निष्पक्ष निर्णय के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस पर विचार न करना “अधूरी सुनवाई” के समान है।
अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ताओं के अनुसार, बस चालक उस समय प्रशिक्षण (training) पर था, जिससे उसकी क्षमता और लाइसेंस की वैधता का मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
इन सभी कारणों से सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसलों को रद्द करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए MACT के पास भेज दिया।

