Kasol Rave Parties : सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के अधिकारियों के खिलाफ FIR के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, ट्रांसफर बरकरार रखा

Shahadat

27 July 2026 8:51 PM IST

  • Kasol Rave Parties : सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के अधिकारियों के खिलाफ FIR के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, ट्रांसफर बरकरार रखा

    सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस के खिलाफ FIR दर्ज करने और विभागीय कार्यवाही के लिए SIT बनाने का निर्देश दिया गया। यह आदेश प्रशासन द्वारा 'मौन सहमति' से रेव पार्टियां आयोजित करने देने के मामले में दिया गया।

    हालांकि, कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश बरकरार रखा और कहा कि ट्रांसफर के आदेश को तुरंत लागू किया जाए। कोर्ट ने माना कि मामले को उनसे दूर रखने के लिए ट्रांसफर जरूरी है।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कुल्लू के DC और SP की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जो हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ थीं। हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों अधिकारियों और संबंधित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी ड्यूटी नहीं निभाई और इसके बजाय बड़े पैमाने पर रेव पार्टियों के आयोजन में मदद की।

    अन्य बातों के अलावा, हाईकोर्ट की बेंच ने गौर किया कि पार्टियां आयोजित करने की अनुमति उन लोगों को दी गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड था (जिसमें NDPS Act के तहत मामले भी शामिल थे) और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस की नकारात्मक रिपोर्ट (जिसमें अनुमति न देने की सिफारिश की गई थी) के बावजूद ऐसा किया गया।

    बता दें, हाईकोर्ट ने यह आदेश कुल्लू और आसपास के इलाकों में अवैध रेव पार्टियों और ड्रग्स के इस्तेमाल से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। कसोल के पास ग्रीन फॉरेस्ट वेन्यू पर 7 से 11 जून, 2026 के बीच हुई घटनाओं का गंभीरता से संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने कहा कि यह मामला कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर और सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस द्वारा "पूरी तरह से घुटने टेकने" का एक "क्लासिक उदाहरण" है।

    हाईकोर्ट ने गौर किया कि ड्रग्स से जुड़े मुद्दों की पहले न्यायिक जांच और डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस की एक खास चेतावनी रिपोर्ट (जिसमें नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और गैर-कानूनी गतिविधियों की आशंका जताई गई) के बावजूद अधिकारियों ने इन कार्यक्रमों के लिए अनुमति दी थी।

    डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) की एक रिपोर्ट ने, जो मौके के निरीक्षण पर आधारित थी, 3,000-5,000 लोगों की भारी भीड़, बिना परमिट शराब की मौजूदगी, रोलिंग पेपर जैसी ड्रग्स से जुड़ी सामग्री मिलने और CCTV फुटेज जब्त होने की पुष्टि की। पुलिस के दखल के बाद दो FIR दर्ज की गईं और दो पर्यटकों के पास कोकीन और LSD मिली। कोर्ट ने विदेशी DJ की ड्रग ओवरडोज़ से हुई संदिग्ध मौत का भी संज्ञान लिया।

    इस आदेश से नाराज़ होकर याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुईं सीनियर एडवोकेट माधवी दीवान ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने अधिकारियों को DSLA रिपोर्ट पर जवाब देने का मौका दिए बिना ही यह आदेश पारित कर दिया।

    जब उन्होंने कहा कि ये कार्यक्रम "रॉक कॉन्सर्ट" थे, न कि "रेव पार्टियां", तो जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

    "यह बात को घुमा-फिराकर कहने जैसा है। कॉन्सर्ट तो बस एक बहाना या पर्दा है।"

    जब दीवान ने दावा किया कि इस आदेश से राज्य की बदनामी हुई है तो जज ने पलटवार करते हुए कहा कि DSP की रिपोर्ट को नज़रअंदाज़ करने के प्रशासन के फैसले से ही "बदनामी हुई"।

    जस्टिस बागची ने टिप्पणी की,

    "हमें समझ नहीं आ रहा... उस इलाके के DSP की रिपोर्ट (जिसमें ऐसी पार्टियों की इजाज़त देने पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर आशंका जताई गई) के बाद भी पुलिस ने उस पार्टी के लिए साउंड वगैरह के लाइसेंस को मंज़ूरी कैसे दी? और वह भी तब, जब आयोजक NDPS मामले में बरी हो चुका आरोपी हो और उस पर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ का आरोप भी रहा हो?"

    इसके बाद दीवान ने कहा कि हाईकोर्ट ने ऐसी पार्टियों के प्रति पहले से बनी नकारात्मक सोच के साथ कार्रवाई की और ट्रांसफर के आदेश ने अधिकारियों की छवि खराब की।

    हालांकि, जस्टिस बागची ने कहा कि ट्रांसफर सबसे कम गंभीर नतीजों में से एक था।

    बाद में दीवान ने कहा कि राजधानी में भी ऐसी पार्टियां/कॉन्सर्ट होते हैं और याचिकाकर्ताओं ने ड्रग से जुड़ी किसी भी घटना की आशंका को देखते हुए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू किया था।

    उन्होंने कहा,

    "उपाय किए गए थे। घटनाएं हो जाती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप रॉक कॉन्सर्ट पर रोक लगा दें। आपको उपाय करने होते हैं और हमने उपाय किए। बिना किसी चरण में हमारी बात सुने, यह एक तरह से दाग लगाने जैसा है।"

    सीनियर वकील ने यह भी बताया कि घटनास्थल के CCTV फुटेज की रिपोर्ट अभी आनी बाकी थी और घटनास्थल से कोई ड्रग बरामद नहीं हुई।

    नोटिस जारी करते हुए CJI ने कहा,

    "ट्रांसफर तुरंत होना चाहिए। आपको वहां काम करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती।"

    जस्टिस बागची ने आगे कहा,

    "हम चाहते हैं कि इस मामले की आगे की जांच आपकी मौजूदगी से प्रभावित न हो। इसीलिए हमने... ट्रांसफर को लागू करवाना सुरक्षा के लिहाज़ से ज़रूरी था।"

    Case Title: ANURAG CHANDER SHARMA Versus HIGH COURT OF HIMACHAL PRADESH, THROUGH REGISTRAR GENERAL AND ORS. Diary No. 42382-2026 (and connected case)

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