आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग से मांगा जवाब
Amir Ahmad
16 Jun 2026 6:34 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को नागरिकता, मूल निवास, पता और जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिका में कहा गया कि आधार अधिनियम, 2016 की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार संख्या किसी व्यक्ति को नागरिकता या मूल निवास का अधिकार प्रदान नहीं करती और न ही उसका प्रमाण मानी जा सकती है।
याचिकाकर्ता ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना का भी हवाला दिया है, जिसमें आधार को केवल पहचान का प्रमाण बताया गया है, न कि नागरिकता, पते या जन्मतिथि का।
याचिका के अनुसार इसके बावजूद आधार को स्कूलों में प्रवेश, संपत्ति खरीदने, जन्म प्रमाणपत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं में उम्र, नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र-6 में भी आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।
याचिका में कहा गया कि इससे घुसपैठिए और अवैध प्रवासी आधार के माध्यम से अन्य दस्तावेज भी हासिल कर लेते हैं।
याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि आधार का उपयोग केवल पहचान के प्रमाण के रूप में किया जाए, न कि नागरिकता, मूल निवास, पता या जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में।
साथ ही यह भी मांग की गई कि प्रपत्र-6 में आधार को जन्मतिथि और निवास के प्रमाण के रूप में स्वीकार करने की व्यवस्था को आधार अधिनियम की धारा 9, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के विपरीत घोषित कर अमान्य ठहराया जाए।
याचिका में कहा गया कि आधार अधिनियम के तहत भारत में 182 दिन निवास करने वाला कोई भी व्यक्ति आधार प्राप्त कर सकता है, चाहे वह भारतीय नागरिक हो या विदेशी नागरिक।
इसमें यह भी दावा किया गया कि किरायानामा और स्थानीय प्राधिकारियों की सिफारिश जैसे दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवाया जा सकता है, जिसके कारण अवैध प्रवासी आधार प्राप्त कर बाद में मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेज हासिल कर लेते हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 23(4) के अनुसार आधार का उपयोग केवल पहचान स्थापित करने के लिए किया जा सकता है, उम्र या निवास साबित करने के लिए नहीं।
याचिका में यह भी कहा गया कि अवैध प्रवास चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, जनसांख्यिकीय संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
मामले में अब केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग के जवाब के बाद आगे सुनवाई होगी।

