न्यायपालिका पर ही केस लंबित होने का ठीकरा फोड़ दिया जाता है, जबकि देरी के लिए केवल अदालतें जिम्मेदार नहीं: जस्टिस दीपांकर दत्ता

Praveen Mishra

3 Aug 2026 6:00 PM IST

  • न्यायपालिका पर ही केस लंबित होने का ठीकरा फोड़ दिया जाता है, जबकि देरी के लिए केवल अदालतें जिम्मेदार नहीं: जस्टिस दीपांकर दत्ता

    सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सोमवार को कहा कि मुकदमों के लंबित रहने (Case Pendency) के लिए अक्सर केवल न्यायपालिका को ही जिम्मेदार ठहराया जाता है, जबकि इसके लिए अदालतें अकेली जिम्मेदार नहीं हैं। उन्होंने संसद में लंबित मामलों को लेकर हुई हालिया चर्चा का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका अक्सर आलोचना का सबसे बड़ा निशाना बन जाती है।

    यह टिप्पणी उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंट तेहमुल बुर्जोर सेठना द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) की सुनवाई के दौरान की। याचिका में गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें अतिरिक्त साक्ष्य के रूप में मेडिकल प्रमाणपत्र पेश करने की अनुमति देने से इनकार किया गया था।

    सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए खर्च (Costs) का मुद्दा उठाया। हालांकि, जस्टिस दत्ता ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    इसी दौरान जस्टिस दत्ता ने कहा, "हम ही आलोचना का सामना करते हैं। आज के अखबार में भी देखा कि संसद में यह चर्चा हो रही है कि न्यायपालिका लोगों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर रही।"

    इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता दवे ने कहा कि मामलों के लंबित रहने का मुद्दा उठते ही न्यायपालिका सबसे आसान निशाना (Favourite Beating Stick) बन जाती है।

    जवाब में जस्टिस दत्ता ने श्री रामकृष्ण परमहंस की पत्नी शारदा देवी का कथन उद्धृत करते हुए कहा, "दूसरों की गलतियां मत देखो, पहले अपनी गलतियां देखो।"

    अंततः सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

    गौरतलब है कि हाल ही में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में 10 वर्ष से अधिक समय से लंबित 10,000 से ज्यादा मामले हैं, जबकि हाईकोर्टों में 30 वर्ष से अधिक समय से लंबित लगभग 80,000 मामले हैं। इससे पहले भी जस्टिस दत्ता सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि मुकदमों के लंबित रहने के लिए केवल न्यायपालिका नहीं, बल्कि कार्यपालिका द्वारा दायर किए जाने वाले अनावश्यक मुकदमे भी काफी हद तक जिम्मेदार हैं।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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