रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीय: सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को परिवारों की मदद करने, शव वापस लाने और मुआवज़ा दिलाने का निर्देश दिया
Shahadat
31 July 2026 7:47 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन भारतीय नागरिकों के शवों की DNA प्रोफ़ाइलिंग करे जो रूसी सेना की तरफ़ से यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मारे गए, ताकि उन्हें वापस लाकर संबंधित परिवारों को सौंपा जा सके।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 26 भारतीयों के परिवारों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन लोगों को कथित तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वे नौकरी की तलाश में रूस गए।
आरोपों के अनुसार, जब ये नागरिक रूस गए तो उनके पासपोर्ट और पहचान के दस्तावेज़ गैर-कानूनी तरीके से ज़ब्त कर लिए गए और उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया। इनमें से ज़्यादातर लोग रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान गोलीबारी में मारे गए। पुष्टि न हो पाने के कारण उनके परिवारों को ज़रूरी मुआवज़ा देने और उनके शवों को वापस लाने का काम रुका हुआ है।
इससे पहले, कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। अप्रैल में सरकार ने कोर्ट को बताया कि 26 भारतीय नागरिकों में से 10 युद्ध में मारे गए और उनमें से ज़्यादातर ने अपनी मर्ज़ी से किए गए कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रूसी सेना की तरफ़ से यूक्रेन के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी (हालांकि कुछ को एजेंटों ने गुमराह किया हो सकता है)। कोर्ट को यह भी बताया गया कि सरकार संबंधित नागरिकों के परिवारों के संपर्क में है और इन मुद्दों को हल करने के लिए कई तरह के उपाय कर रही है।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं का दावा था कि सरकार ने उनसे संपर्क नहीं किया और जो शव वापस लाए जा रहे हैं, उनकी पहचान नहीं हो पा रही है। इसके अलावा, मानव तस्करी के आरोप भी लगाए गए और यह मुद्दा भी उठाया गया कि सरकार DNA सैंपल इकट्ठा नहीं कर रही है (ताकि रूस से भारत लाए जा रहे शवों का मिलान और पुष्टि की जा सके)।
शुक्रवार को याचिकाकर्ताओं के वकील ने अनुरोध किया कि विदेश मंत्रालय याचिकाकर्ताओं (प्रभावित परिवारों) के साथ बैठक करे। उन्होंने फिर से आरोप लगाया कि शवों की DNA प्रोफ़ाइलिंग नहीं की जा रही है और परिवारों के पास यह पक्का करने का कोई तरीका नहीं है कि उन्हें लौटाए गए शव उनके परिवार के सदस्यों के ही हैं।
हालांकि, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इन दावों को खारिज किया। उन्होंने बताया कि कुछ परिवारों ने अपने DNA सैंपल देने से इनकार किया था और शव वापस लाने का अनुरोध उनकी तरफ़ से ही किया जाना चाहिए, ताकि सरकार रूस से शवों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू कर सके। ASG ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं के वकील इस मामले से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे।
आखिरकार कोर्ट ने निर्देश दिया कि MEA परिवारों से बातचीत के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे।
ये निर्देश जारी किए गए -
(i) MEA एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेगा, जिसकी जानकारी और संपर्क नंबर रूस गए मृतक/घायल भारतीय नागरिकों के परिवार के सदस्यों को दिए जाएंगे।
(ii) किसी की मौत होने की स्थिति में MEA शवों की पहचान के लिए परिवार के सदस्यों के साथ शवों का DNA टेस्ट करवाएगा। यह प्रक्रिया पूरी होने पर DNA टेस्ट के सर्टिफिकेट के साथ शव परिवार के सदस्यों को सौंप दिया जाएगा।
(iii) रूसी अधिकारियों के पास मुआवज़े का दावा करने की पूरी प्रक्रिया और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ परिवार के सदस्यों को उपलब्ध कराए जाएं। परिवार MEA के ज़रिए रूसी अधिकारियों के पास अपने दावे जमा कर सकते हैं। हालांकि, ऐसे दावों के लंबित रहने के आधार पर अंतिम संस्कार या शव सौंपने में देरी नहीं की जानी चाहिए। इस प्रक्रिया को अलग से तेज़ी से पूरा किया जाना चाहिए।
(iv) लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी प्रभावित परिवारों को दावे जमा करने और DNA टेस्ट करवाने के लिए मुफ़्त कानूनी सहायता प्रदान करेगी।
आदेश सुनाए जाने के बाद ASG ने कोर्ट को बताया कि रूसी सेना में शामिल 219 भारतीय नागरिकों में से 139 को सेवा से मुक्त किया गया। 51 लोगों के मारे जाने या लापता होने की सूचना थी, जिनमें से 29 के शव वापस लाए जा चुके हैं।
Case : DIVYA v. UNION OF INDIA W.P.(C) No. 451/2026


