सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आयकर कानून की धारा 147A का मामला, केंद्र ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

Praveen Mishra

16 Sept 2026 12:52 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट पहुंचा आयकर कानून की धारा 147A का मामला, केंद्र ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को दी चुनौती

    केंद्र सरकार ने आयकर अधिनियम की धारा 147A को असंवैधानिक घोषित करने वाले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। केंद्र ने इस मामले में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर तत्काल सुनवाई की मांग की।

    केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एन. वेंकटरमण ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से आयकर कानून में एक बड़ा कानूनी शून्य पैदा हो गया है। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को शीघ्र सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

    क्या है विवाद?

    विवाद क्षेत्राधिकार वाले आकलन अधिकारी और बिना प्रत्यक्ष संपर्क वाली कर आकलन व्यवस्था के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर है।

    बिना प्रत्यक्ष संपर्क वाली आकलन व्यवस्था लागू होने के बाद यह सवाल उठा कि क्या क्षेत्राधिकार वाला आकलन अधिकारी स्वतंत्र रूप से धारा 148 के तहत पुनर्मूल्यांकन का नोटिस जारी कर सकता है और धारा 148A के तहत आदेश पारित कर सकता है, या इसके लिए निर्धारित बिना प्रत्यक्ष संपर्क वाली प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।

    इस मुद्दे पर अलग-अलग हाईकोर्ट के फैसलों में भिन्नता रही है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आयकर अधिकारी बनाम तेज प्रताप सिंह मामले में बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए क्षेत्राधिकार वाले अधिकारियों द्वारा शुरू की गई पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही को अमान्य माना था।

    संसद ने बाद में जोड़ी धारा 147A

    इन न्यायिक फैसलों के बाद संसद ने 1 अप्रैल 2021 से पूर्वव्यापी प्रभाव से आयकर अधिनियम में धारा 147A जोड़ी।

    इस प्रावधान के जरिए स्पष्ट किया गया कि धारा 148 और 148A में इस्तेमाल किया गया “आकलन अधिकारी” शब्द राष्ट्रीय बिना प्रत्यक्ष संपर्क वाले आकलन केंद्र के अलावा अन्य आकलन अधिकारियों को भी संदर्भित करता है।

    व्यावहारिक रूप से इस संशोधन का उद्देश्य क्षेत्राधिकार वाले आकलन अधिकारियों को पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही करने का अधिकार स्पष्ट करना था।

    हाईकोर्ट ने धारा 147A को क्यों रद्द किया?

    पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने धारा 147A को असंवैधानिक ठहराते हुए कहा कि विधायिका पूर्वव्यापी कानून बनाकर संवैधानिक अदालतों द्वारा पहले ही तय किए गए कानूनी निष्कर्षों को केवल इस तरह नहीं बदल सकती कि संबंधित कानूनी स्थिति हमेशा से वैध थी।

    हाईकोर्ट के अनुसार, संशोधन का प्रभाव पहले दिए गए न्यायिक निर्णयों को निष्प्रभावी करने वाला था।

    अब सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल धारा 147A की संवैधानिक वैधता और पुनर्मूल्यांकन कार्यवाही में क्षेत्राधिकार वाले आकलन अधिकारियों की भूमिका से जुड़ा है।

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    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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