अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
8 April 2026 10:41 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब किसी अनारक्षित सीट पर क्षैतिज आरक्षण लागू होता है तो उस अनारक्षित सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार उन सभी उम्मीदवारों को होता है जिनके पास वह क्षैतिज विशेषता (Horizontal Attribute) मौजूद है, चाहे वे SC, ST, OBC या सामान्य श्रेणी के हों।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर सिविल इंजीनियर के एक पद को यूआर (PWD-LV) के तहत अधिसूचित किया गया। यह एक अनारक्षित पद है, जिसे दिव्यांग व्यक्तियों (कम दृष्टि/दृष्टिहीनता) के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित किया गया। प्रतिवादी नंबर 3 OBC-A (अत्यंत पिछड़ा वर्ग) श्रेणी से संबंधित है, जिसमें PWD-LV की विशेषताएं मौजूद हैं। उसे कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा इस पद के लिए चयनित होने से वंचित कर दिया गया, जबकि उसने UR (PWD-LV) श्रेणी के उम्मीदवार की तुलना में अधिक अंक प्राप्त किए।
हाईकोर्ट ने यह तर्क दिया कि चूंकि UR-PWD श्रेणी का उम्मीदवार उपलब्ध था, इसलिए इस पद को उसी उम्मीदवार द्वारा भरा जाना चाहिए, चाहे उसकी योग्यता (Merit) तुलनात्मक रूप से कम ही क्यों न हो।
हाईकोर्ट का निर्णय रद्द करते हुए जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह द्वारा लिखे गए फैसले में यह टिप्पणी की गई कि यूआर (PWD-LV) श्रेणी का उद्देश्य सभी ऊर्ध्वाधर सामाजिक श्रेणियों (vertical social categories)—चाहे वे SC, ST, या OBC हों—के सभी उम्मीदवारों के लिए था, बशर्ते कि ऐसे उम्मीदवार स्वयं भी दिव्यांग व्यक्ति हों।
कोर्ट ने कहा,
"...यदि कोई अनारक्षित/खुला पद दिव्यांग व्यक्तियों की विशेष श्रेणी के लिए निर्धारित है तो इसका तात्पर्य यह है कि उक्त पद सभी ऊर्ध्वाधर सामाजिक श्रेणियों—चाहे वे SC, ST, या OBC हों—के सभी उम्मीदवारों के लिए खुला रहेगा, बशर्ते कि ऐसे उम्मीदवार स्वयं भी दिव्यांग व्यक्ति हों। अतः, सभी उम्मीदवार—चाहे वे SC, ST, या OBC श्रेणी के हों, परंतु यदि वे दिव्यांग व्यक्ति हैं—तो वे सभी अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत आने वाले दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित पद पर प्रतिस्पर्धा करने के समान रूप से हकदार हैं। इसका मूल तर्क यह है कि जो सभी व्यक्ति समान परिस्थितियों में हैं, उनके साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।"
खंडपीठ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत होने वाली नियुक्तियों के लिए 'योग्यता' (Merit) ही एकमात्र निर्णायक मापदंड है। कोर्ट ने यह माना कि किसी अधिक योग्य उम्मीदवार को केवल इस आधार पर चयन से वंचित करना कि वह किसी आरक्षित श्रेणी से संबंधित है, मनमाना और समानता के अधिकार का उल्लंघन माना जाएगा।
चूंकि OBC-A/PWD श्रेणी के उम्मीदवार ने अधिक अंक प्राप्त किए, इसलिए उसे UR (PWD-LV) पद पर नियुक्त करना पूर्णतः न्यायसंगत था।
अदालत ने टिप्पणी की,
“भले ही अनारक्षित श्रेणी के तहत योग्य PWD-LV उम्मीदवार उपलब्ध हों, लेकिन यदि किसी अन्य सामाजिक आरक्षित श्रेणी का कोई PWD-LV उम्मीदवार उपलब्ध है, जो उपलब्ध अनारक्षित PWD-LV उम्मीदवार की तुलना में योग्यता (Merit) में बेहतर है तो उक्त पद को योग्यता के आधार पर, कम योग्य अनारक्षित उम्मीदवार के दावे को नज़रअंदाज़ करते हुए, अधिक योग्य आरक्षित PWD-LV उम्मीदवार द्वारा भरा जाएगा।”
अनुपलब्धता संबंधी शर्त (Clause) स्पष्ट की गई
भर्ती अधिसूचना में कहा गया कि यदि कोई UR-PWD उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होता है तो रिक्ति को अन्य श्रेणियों के उम्मीदवारों द्वारा भरा जा सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस शर्त का यह अर्थ नहीं है कि किसी भी UR उम्मीदवार की उपस्थिति—भले ही वह योग्यता में कितना भी कम क्यों न हो—आरक्षित श्रेणियों के अधिक योग्य उम्मीदवारों को स्वतः ही बाहर कर देती है।
आगे कहा गया,
“इसके बजाय, ऐसी शर्तें वैकल्पिक प्रावधान (Fallback Provisions) होती हैं और ये खुली श्रेणी की नियुक्तियों में योग्यता के मूल सिद्धांत को दरकिनार नहीं कर सकतीं।”
अदालत ने टिप्पणी की,
“…PWD-LV की यह हॉरिजॉन्टल रूप से आरक्षित पोस्ट, जो अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत आती है, किसी भी सामाजिक आरक्षित श्रेणी से संबंधित किसी भी PWD-LV उम्मीदवार द्वारा भरी जा सकती है; क्योंकि अनारक्षित श्रेणी के तहत PWD-LV की यह पोस्ट किसी भी सामाजिक आरक्षित श्रेणी से संबंधित सभी PWD-LV उम्मीदवारों के लिए भी खुली है।”
अदालत ने आगे कहा,
“वर्तमान मामले में इस अनारक्षित/खुली श्रेणी से जुड़ी एकमात्र शर्त यह है कि यह केवल हॉरिजॉन्टल PWD-LV श्रेणी से संबंधित उम्मीदवारों के लिए है, यानी, यह विशेष रूप से उन व्यक्तियों के लिए आरक्षित है, जिन्हें PWD-LV के रूप में वर्गीकृत किया गया। PWD-LV के लिए अनारक्षित पोस्ट/रिक्ति सभी के लिए उपलब्ध और खुली है, चाहे वे किसी भी सामाजिक श्रेणी से संबंधित हों, बशर्ते कि वे PWD-LV की उसी विशेष श्रेणी से भी संबंधित हों। चूंकि उक्त पोस्ट अनारक्षित श्रेणी के अंतर्गत आती है, इसलिए इसे पूरी तरह से योग्यता के आधार पर भरा जाना है। योग्यता, 'अनारक्षित' श्रेणी के तहत किसी भी पोस्ट पर नियुक्ति का एक सहवर्ती और अविभाज्य गुण है। परिणामस्वरूप, किसी भी सामाजिक आरक्षित श्रेणी से संबंधित प्रत्येक व्यक्ति, दूसरों के साथ—जिनमें 'अनारक्षित' श्रेणी के लोग भी शामिल हैं—प्रतिस्पर्धा कर सकता है। ऐसी अनारक्षित पोस्ट पर नियुक्त किया जा सकता है, जब तक कि वे विशेष PWD-LV श्रेणी से संबंधित हों; क्योंकि शर्त यह है कि अनारक्षित श्रेणी के तहत पोस्ट, PWD-LV की हॉरिजॉन्टल श्रेणी के लिए आरक्षित है।”
अदालत ने फैसला सुनाया,
चूंकि प्रतिवादी नंबर 3 ने UR (अनारक्षित) पोस्ट का दावा करने के लिए किसी भी प्रकार की छूट (यूनियन ऑफ इंडिया बनाम साजिब रॉय के अनुसार) का लाभ नहीं उठाया, इसलिए उसे राहत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस प्रकार, अदालत ने UR (PWD-LV) पोस्ट पर प्रतिवादी नंबर 3 के चयन की पुष्टि की।
Cause Title: THE WEST BENGAL STATE ELECTRICITY TRANSMISSION CO.LTD & ORS. VERSUS DIPENDU BISWAS & ORS.

