हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, तत्काल सुनवाई की मांग

Praveen Mishra

2 July 2026 4:02 PM IST

  • हनीमून मर्डर केस: सोनम रघुवंशी की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, तत्काल सुनवाई की मांग

    मेघालय सरकार ने हनीमून मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सरकार ने मेघालय हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा गया था।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की अध्यक्षता वाली अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। उन्होंने दलील दी कि सोनम को केवल इस आधार पर जमानत दी गई कि गिरफ्तारी के समय उसे गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) सही ढंग से नहीं बताए गए थे। उनके अनुसार, यह केवल एक टाइपोग्राफिकल त्रुटि थी, जिसमें धारा 103(1) BNS (हत्या) के स्थान पर गलती से धारा 403(1) BNS का उल्लेख कर दिया गया था। एसजी ने यह भी कहा कि आरोपी के फरार होने की आशंका है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले को अगले दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।

    दरअसल, शिलांग की अतिरिक्त जिला एवं सत्र अदालत ने यह कहते हुए सोनम को जमानत दी थी कि पुलिस गिरफ्तारी के आधार प्रभावी ढंग से बताने में विफल रही, जिससे उसके बचाव के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। 29 जून को मेघालय हाईकोर्ट ने भी इस आदेश को बरकरार रखते हुए कहा था कि गिरफ्तारी से जुड़े कई दस्तावेजों में एक जैसी गलती यह दर्शाती है कि उन्हें पर्याप्त सावधानी और विचार के बिना तैयार किया गया था।

    यह मामला राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। राजा और सोनम की शादी 12 मई 2025 को हुई थी और दोनों 23 मई को मेघालय में हनीमून के दौरान लापता हो गए थे। बाद में राजा का शव ईस्ट खासी हिल्स स्थित एक गहरी खाई से बरामद हुआ, जबकि सोनम 8 जून को उत्तर प्रदेश में मिली। जांच के दौरान पुलिस ने सोनम और उसके कथित प्रेमी राज कुशवाहा को हत्या का मुख्य आरोपी बताया।

    मेघालय पुलिस इस मामले में 700 से अधिक पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि राजा रघुवंशी की हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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