नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी का अपराध नहीं, बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

3 Aug 2026 6:20 PM IST

  • नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी का अपराध नहीं, बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द किया, जिस पर अपनी गाड़ी की पिछली नंबर प्लेट छिपाने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को केवल यह शक होना कि नंबर प्लेट ट्रैफिक चालान से बचने के लिए छिपाई गई थी, धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा,

    "पुलिस का यह शक कि पिछली नंबर प्लेट चालान से बचने के लिए छिपाई गई, या यह कि अपराध होने पर अपराधी का पता लगाना मुश्किल होगा, ज़्यादा से ज़्यादा एक अनुमान ही है... अपीलकर्ता पर एकमात्र आरोप यह है कि वह अपनी एक्टिवा स्कूटी पर पिछली नंबर प्लेट को काले मास्क से ढककर यात्रा कर रहा था। रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे पता चले कि ऐसा काम बेईमानी की नीयत से किया गया, या इस काम से किसी व्यक्ति को गलत तरीके से फायदा या नुकसान हुआ हो।"

    कोर्ट ने कहा कि नंबर प्लेट छिपाने पर ज़्यादा से ज़्यादा मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 (MV Act) के तहत जुर्माना लग सकता है, लेकिन इसे आपराधिक अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

    कोर्ट ने कहा,

    "MV Act और उसके नियमों के तहत नंबर प्लेट को छिपाना रेगुलेटरी उल्लंघन है, जिसे ज़रूरी शर्तों को साबित किए बिना IPC की धारा 420 के तहत अपराध का रूप नहीं दिया जा सकता।"

    मामले की असल बात संक्षेप में यह थी कि अपीलकर्ता काले रंग की होंडा एक्टिवा चला रहा था और उसकी पिछली नंबर प्लेट काले मास्क से ढकी हुई थी।

    पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात शिकायतकर्ता ने उसे रोका और पकड़ा, जिसके बाद उसके खिलाफ IPC की धारा 420 और MV Act की धारा 80(a) के तहत FIR दर्ज की गई। आरोप लगाया गया कि उसने ट्रैफिक चालान से बचने की कोशिश करके पुलिस को धोखा दिया है। इसके बाद चार्जशीट दाखिल की गई, जिस पर मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया।

    याचिकाकर्ता-आरोपी ने FIR रद्द कराने के लिए BNSS की धारा 528 के तहत तेलंगाना हाईकोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट द्वारा उसकी याचिका खारिज किए जाने (यह मानते हुए कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है) से असंतुष्ट होकर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। विवादित आदेश रद्द करते हुए जस्टिस मसीह ने याचिकाकर्ता के खिलाफ धोखाधड़ी का लंबित मामला खारिज किया। उन्होंने कहा कि धोखाधड़ी के अपराध के लिए ज़रूरी तत्व साबित नहीं हुए।

    IPC की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध मानने के लिए ज़रूरी तत्व ये हैं:

    (1) बेईमानी की नीयत

    (2) किसी व्यक्ति को उकसाना, और

    (3) संपत्ति सौंपना, या कीमती संपत्ति में बदलाव करना या उसे नष्ट करना।

    कोर्ट ने कहा,

    "हमारी यह भी राय है कि सिर्फ़ पीछे की नंबर प्लेट को ढकना, जबकि आगे की प्लेट साफ़ दिख रही हो, पहचान या पकड़ से बचने की किसी सोची-समझी योजना के खिलाफ़ है। साथ ही यह बेईमानी की नीयत होने के आरोपों के भी खिलाफ़ है... आरोपों को अगर सही भी मान लिया जाए तो भी वे धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनाते। अपीलकर्ता के खिलाफ़ कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।"

    इसके आधार पर याचिका मंज़ूर कर ली गई। साथ ही यह स्पष्ट किया गया कि MV Act के तहत याचिकाकर्ता पर लगाई गई देनदारी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

    कोर्ट ने कहा,

    "हम स्पष्ट करते हैं कि इस मामले को रद्द करने से MV Act की धारा 177 के तहत जुर्माना भरने की अपीलकर्ता की देनदारी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि अगर उसने पहले से ऐसा नहीं किया है, तो वह एक महीने के भीतर संबंधित अधिकारी के पास यह जुर्माना जमा करे।"

    Cause Title: MOHAMMED ABDUL AHAD SHAKER VERSUS STATE OF TELANGANA AND ANOTHER

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