सिर्फ़ इसलिए दोषी नहीं माना जा सकता कि जांच अधिकारी पर मिलीभगत के आरोप हैं: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
2 Sept 2026 8:01 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर) को कहा कि हालांकि खराब जांच का फ़ायदा आरोपी को नहीं मिल सकता, लेकिन अदालतें सिर्फ़ इसलिए आरोपी को दोषी नहीं मान सकतीं कि जांच अधिकारी (IO) असहयोगी था या उस पर मिलीभगत के आरोप हैं, खासकर तब जब अभियोजन पक्ष आरोपी का दोष साबित करने के लिए भरोसेमंद सबूत पेश करने में नाकाम रहा हो।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,
"खराब जांच का फ़ायदा आरोपी को नहीं मिल सकता, लेकिन जब कोई भरोसेमंद सबूत न हो, तो सिर्फ़ इसलिए कि IO असहयोगी था या उसके ख़िलाफ़ मिलीभगत की शिकायत की गई, अदालत आरोपी को दोषी नहीं मान सकती।"
अभियोजन पक्ष का मामला यह था कि मृतक, चार अन्य लोगों (एक बेटा, कर्मचारी, भतीजा और ग्रामीण) के साथ खेतों की ओर जा रहा था, तभी आरोपियों ने उन पर घात लगाकर हमला किया, अंधाधुंध गोलीबारी की और मृतक की पीठ में गोली मार दी। गोली लगने से पीड़ित की मौत हो गई। मजिस्ट्रेट के साथ एक पेट्रोलिंग कार मौके पर पहुंची और आरोपी भाग गए।
अभियोजन पक्ष ने नौ गवाहों के साथ मुकदमा चलाया। आरोपियों को IPC की धारा 302 और 307 के साथ धारा 149 के तहत दोषी ठहराया गया। अपनी सज़ा बरकरार रखने के हाईकोर्ट के फ़ैसले से नाराज़ होकर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
हाईकोर्ट ने मामले पर विचार करते हुए IO के ख़िलाफ़ एक शिकायत पाई, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने मिलीभगत वाली जांच की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि यह शिकायत किसी भी चश्मदीद गवाह से नहीं मिली और इसमें जांच की कमियों के बारे में नहीं बताया गया।
इसके बावजूद हाईकोर्ट ने कथित मिलीभगत के आधार पर यह समझाया कि स्वतंत्र गवाहों से पूछताछ क्यों नहीं की गई, खून से सनी मिट्टी को केमिकल जांच के लिए क्यों नहीं भेजा गया और खून से सने कपड़े क्यों ज़ब्त नहीं किए गए। फिर उसने चश्मदीद गवाहों की गवाही को "एक जैसा सबूत" माना और आरोपियों को दोषी ठहराया।
आरोपियों ने पुलिस की खराब जांच का हवाला देते हुए अपनी सज़ा को चुनौती दी। साथ ही उन्होंने तर्क दिया कि उनके दोष को बिना किसी शक के साबित करने के लिए रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं लाया गया। आरोपी के पक्ष का विरोध करते हुए और सज़ा को सही ठहराते हुए राज्य ने तर्क दिया कि सिर्फ़ खराब जांच से आरोपी को फ़ायदा नहीं मिल सकता, खासकर तब जब जांच अधिकारी (IO) असहयोगी हो गया हो।
राज्य की दलील खारिज करते हुए जस्टिस चंद्रन के फ़ैसले में इस बात से तो सहमति जताई गई कि खराब जांच का फ़ायदा आरोपी को नहीं मिल सकता, लेकिन यह भी साफ़ किया गया कि जब IO असहयोगी हो जाए तो अदालतें आरोपी को दोषी नहीं मान सकतीं; बल्कि सज़ा तभी सुनाई जा सकती है जब भरोसेमंद सबूत पेश किए जाएं जो बिना किसी शक के आरोपी का अपराध साबित करें।
अदालत ने कहा,
"इस मामले में सबूतों की पूरी तरह कमी है और हमने देखा कि गवाहों के बयान भरोसे के लायक नहीं हैं।"
अदालत ने बताया कि सिर्फ़ IO की मिलीभगत से आरोपी को दोषी नहीं माना जा सकता। इसके बजाय, ऐसे सबूत पेश किए जाने चाहिए, जिनसे यह भरोसा हो कि आरोपी ने अपराध किया।
अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने IO के ख़िलाफ़ दर्ज शिकायत को ज़्यादा महत्व देकर गलती की; अदालत ने इसे अभियोजन पक्ष (Prosecution) द्वारा अपने मामले की कमियों को छिपाने की एक चाल बताया।
अदालत ने कहा,
"यह मामला खराब जांच का नहीं, बल्कि जांच न होने का है। यहां तक कि शव का मुआयना (Inquest) भी FIR दर्ज होने से पहले ही कर लिया गया, जिससे यह पहले से तय (Pre-Meditated) लगता है। हाईकोर्ट ने IO के ख़िलाफ़ उस शिकायत को देखकर बहुत बड़ी गलती की, जो ट्रायल के दौरान पेश नहीं की गई और उसी के आधार पर आरोपी के अपराध को साबित करने वाले सबूतों को निर्णायक मान लिया।"
इसके अलावा, अदालत ने जांच में कई गंभीर कमियों की ओर इशारा किया, जैसे कि अभियोजन पक्ष के अंधाधुंध गोलीबारी के आरोपों के बावजूद घटनास्थल से कारतूस बरामद नहीं किए गए। जिस गोली से जानलेवा चोट लगी और जो मृतक के शरीर से बाहर निकली, वह भी बरामद नहीं हुई। आरोपी द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों को बरामद करने की भी कोई कोशिश नहीं की गई। हालांकि घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी इकट्ठा की गई थी, लेकिन उसे केमिकल जांच के लिए नहीं भेजा गया।
अदालत ने यह भी गौर किया कि शव का मुआयना FIR दर्ज होने से पहले ही कर लिया गया; अदालत ने कहा कि इस क्रम से पता चलता है कि मुआयना "पहले से तय" (Pre-Meditated) था।
अदालत ने कहा,
"हमें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे अभियोजन पक्ष बिना किसी शक के आरोपी का अपराध साबित कर सके।"
नतीजतन, अपील मंज़ूर कर ली गई, जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ़ हो गया।
Cause Title: Dhrub Singh Etc. v. The State of Bihar


