सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रदर्शन पर सुनवाई टाली, सरकार और किसानों की बातचीत जारी

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    पंजाब के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की खंडपीठ को बताया कि अब तक दो बैठकें हो चुकी हैं – 14 फरवरी और 22 फरवरी को। अगली बैठक 19 मार्च को होनी है। केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा, अदालत द्वारा नियुक्त उच्चस्तरीय समिति भी किसानों के साथ बातचीत कर रही है।

    आज, जस्टिस कांत ने सुझाव दिया कि समिति के पूर्णकालिक सदस्य को वेतन दिया जाना चाहिए।

    इस समिति के सदस्य हैं:

    जस्टिस (रिटायर्ड) नवाब सिंह, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व जज – अध्यक्ष

    श्री बी.एस. संधू, आईपीएस (रिटायर्ड), हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक, जो मूल रूप से पंजाब से हैं – सदस्य

    श्री देविंदर शर्मा – सदस्य

    प्रो. रणजीत सिंह घुम्मन, जीएनडीयू अमृतसर (पंजाब) में प्रोफेसर और सीआरआरआईडी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर – सदस्य

    डॉ. सुखपाल सिंह, कृषि अर्थशास्त्री, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना – सदस्य

    विशेष आमंत्रित सदस्य - प्रोफेसर बी.आर. कांबोज, कुलपति, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय, हिसार

    इस पर सिंह ने कहा,

    "मेरी जानकारी के अनुसार, अच्छी खासी राशि का भुगतान किया गया है।" इस पर न्यायमूर्ति कांत ने बताया कि यह राशि केवल हुए खर्चों की भरपाई के लिए दी गई है।

    अदालत ने आदेश दिया,

    "केंद्र सरकार और किसानों के बीच बातचीत जारी है, जिसमें राज्य सरकार के दो मंत्री भी शामिल हुए हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, हम इस मामले को अगली सुनवाई तक टालते हैं। हमने 24 फरवरी 2025 को उच्चस्तरीय समिति की अंतरिम रिपोर्ट भी देखी है। अब तक समिति ने जो प्रयास किए हैं, हम उसकी सराहना करते हैं। हमें भरोसा है कि समिति शांति और आपसी सहमति से विवाद सुलझाने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी।"

    अदालत ने आगे कहा,

    "जहां समिति के अधिकतर सदस्य सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी हैं, वहीं एक सदस्य पूर्णकालिक हैं और किसी पद पर कार्यरत नहीं हैं। इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि उन्हें अन्य खर्चों के अलावा 1 लाख रुपये का भुगतान किया जाए। समिति के अध्यक्ष और ऐसे सदस्य जो किसी संस्थान से वेतन नहीं ले रहे हैं, उन्हें प्रति बैठक 2 लाख रुपये का मानदेय दिया जाए। वहीं, अन्य सदस्यों को भी समिति के अनुसार 1 लाख रुपये का मानदेय दिया जाएगा।"

    22 जनवरी को अदालत को सूचित किया गया था कि किसानों के नेता जगजीत सिंह दलवाले ने न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसे मुद्दों पर विरोध करने वाले किसानों के साथ बातचीत शुरू करने के बाद चिकित्सा हस्तक्षेप को स्वीकार कर लिया है।

    पिछले साल नवंबर से भूख की हड़ताल पर हैं, डललेवाल को उनके स्वास्थ्य के बिगड़ने के बाद मेडिकल अस्पताल में स्थानांतरित करने का आदेश दिया गया था।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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