Ex-Parte मामलों में भी कोर्ट को मुख्य मुद्दे तय कर कारण के साथ फैसला देना होगा: सुप्रीम कोर्ट

Praveen Mishra

17 April 2026 4:30 PM IST

  • Ex-Parte मामलों में भी कोर्ट को मुख्य मुद्दे तय कर कारण के साथ फैसला देना होगा: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भले ही एक्स-पार्टी (ex-parte) सिविल मामलों में औपचारिक रूप से मुद्दे (issues) तय करना अनिवार्य न हो, लेकिन अदालतों के लिए “निर्णय के बिंदु” (points for determination) तय करना और उन पर कारण सहित फैसला देना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसा न करने पर कार्यवाही “material irregularity” मानी जाएगी।

    जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा खारिज किए गए एक वाद को बरकरार रखा गया था।

    मामला “specific performance” से जुड़ा था, जिसे एक्स-पार्टी सुनवाई में इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वादी प्रतिवादी के संपत्ति पर स्वामित्व (title) साबित नहीं कर सका। अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि “title” से संबंधित कोई मुद्दा तय ही नहीं किया गया था, इसलिए उसे इस पहलू पर साक्ष्य पेश करने का अवसर भी नहीं मिला।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि भले ही सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के तहत एक्स-पार्टी मामलों में मुद्दे तय करना जरूरी नहीं है, लेकिन अदालत को विवादित प्रश्नों की पहचान कर उन्हें “निर्णय के बिंदु” के रूप में तय करना होगा और हर बिंदु पर स्पष्ट निष्कर्ष देना होगा।

    कोर्ट ने पाया कि बिना मुद्दे तय किए वाद खारिज करने से अपीलकर्ता को नुकसान हुआ। इस आधार पर पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया और निर्देश दिया कि सभी मुद्दे तय कर दोनों पक्षों को साक्ष्य पेश करने का उचित अवसर दिया जाए।

    इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि न्यायिक निर्णय केवल औपचारिकता नहीं हो सकता, बल्कि उसमें विवाद के हर महत्वपूर्ण पहलू पर स्पष्ट और तर्कसंगत निष्कर्ष होना चाहिए।

    Next Story