चुनाव याचिका का फैसला रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर ही होना चाहिए, सबूतों की कमी पूरी करने के लिए इसे वापस नहीं भेजा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

2 April 2026 3:06 PM IST

  • चुनाव याचिका का फैसला रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर ही होना चाहिए, सबूतों की कमी पूरी करने के लिए इसे वापस नहीं भेजा जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि चुनाव याचिका का फैसला रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर ही किया जाना चाहिए। अपीलीय अदालत के लिए यह स्वीकार्य नहीं है कि वह चुनाव याचिकाओं को दोबारा विचार के लिए वापस भेज दे, सिर्फ इसलिए कि नए सबूत पेश किए जा सकें या गवाहों को बुलाकर विशेषज्ञों से जांच कराई जा सके, जबकि ये मुद्दे चुनाव ट्रिब्यूनल के सामने उठाए ही नहीं गए।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता के 'दोहरे मतदान' (Double Voting) के आरोप में दम पाते हुए प्रतिवादी के सरपंच पद का चुनाव रद्द कर दिया। पहली अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले को सही ठहराया कि नए सिरे से चुनाव कराया जाए।

    हालांकि, हाईकोर्ट ने अपनी रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए इस फैसले में दखल दिया। हाईकोर्ट ने चुनाव याचिका को दोबारा विचार के लिए वापस भेज दिया और निर्देश दिया कि मतदाताओं को गवाह के तौर पर बुलाया जाए तथा मतदाता सूचियों पर लगे अंगूठे के निशानों की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।

    हाईकोर्ट ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि चुनाव याचिका का फैसला "आवश्यक प्रक्रियाओं" (Required Recourses) को अपनाए बिना ही कर दिया गया—जैसे कि मतदाताओं को गवाह के तौर पर पेश करना या विशेषज्ञों से सबूत हासिल करना। कोर्ट ने कहा कि इस तरह के निष्कर्ष "गलत तरीके से निकाले गए" और वे "पूरी तरह से केवल अनुमानों पर आधारित थे।"

    हाईकोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। अपीलकर्ता का तर्क था कि हाई कोर्ट इस तरह से सबूतों की दोबारा जांच का निर्देश देकर—जिसमें मतदाताओं को गवाह के तौर पर बुलाया जाना था, जबकि ट्रायल के दौरान ऐसी कोई मांग की ही नहीं गई—मामले में रह गई कमियों को पूरा नहीं कर सकता।

    हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की,

    "हाईकोर्ट को इस तरह से सबूत पेश करने के निर्देश नहीं देने चाहिए थे, क्योंकि चुनाव याचिका का फैसला तो रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर ही किया जाना होता है, जिन्हें दोनों पक्षकारों द्वारा पेश किया गया हो।"

    कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट के ये निर्देश एक तरह से प्रतिवादी को अपने मामले में रह गई कमियों (Lacuna) को पूरा करने की अस्वीकार्य अनुमति देने जैसा था।

    कोर्ट ने टिप्पणी की,

    "अपील का फैसला तो कोर्ट के सामने मौजूद सामग्री के आधार पर ही किया जाना चाहिए था। इस तरह से गवाहों को बुलाने या विशेषज्ञों से जांच कराने के व्यापक निर्देश नहीं दिए जा सकते थे, जबकि दोनों में से किसी भी पक्ष ने ट्रिब्यूनल के सामने ऐसा कोई मुद्दा उठाया ही नहीं था। चुनाव याचिका से संबंधित कार्यवाही में मामले की कमियों को पूरा करने की कोई गुंजाइश नहीं होती है।"

    तदनुसार, अपील का निपटारा कर दिया गया। साथ ही रिट याचिका को उसकी मूल फ़ाइल में वापस भेजते हुए हाईकोर्ट को यह निर्देश दिया गया कि वह इस मामले का निर्णय केवल मौजूदा साक्ष्य रिकॉर्ड के आधार पर गुण-दोष के आधार पर नए सिरे से करे।

    Cause Title: RAKAM SINGH VERSUS AMIT & ORS.

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