डॉ. सुब्बैया हत्याकांड : सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का बरी करने वाला फैसला पलटा, 7 दोषियों को उम्रकैद; 2 को क्षमादान याचिका की अनुमति
Praveen Mishra
19 May 2026 4:40 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चर्चित डॉ. सुब्बैया हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई सजा को बहाल कर दिया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों का सही ढंग से मूल्यांकन नहीं किया और ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष कानूनन टिकाऊ थे।
यह मामला वर्ष 2013 का है, जब चेन्नई में प्रसिद्ध डॉक्टर सुब्बैया पर बिलरोथ अस्पताल से लौटते समय दरांती (Sickle) से हमला किया गया था।
हमले में उन्हें सिर, गर्दन और कंधों पर गंभीर चोटें आई थीं, जिससे उनकी मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आया था कि हत्या के पीछे संपत्ति विवाद मुख्य वजह थी।
मामले में कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें A1 पोनुस्वामी, उनकी पत्नी मैरी पुष्पन, और उनके बच्चे भी शामिल थे।
ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 7 को फांसी और 2 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
हालांकि बाद में मद्रास हाईकोर्ट ने जांच में कथित खामियों का हवाला देकर सभी को बरी कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पुनः बहाल करते हुए सभी आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। तमिलनाडु सरकार ने अदालत को बताया कि वह अब मृत्युदंड की मांग नहीं कर रही है।
हालांकि, अदालत ने A1 और A2 के मामले में नरमी बरती। कोर्ट ने कहा कि दोनों वृद्ध हैं और उन्होंने अपने बच्चों A3 और A4 के प्रति भावनात्मक लगाव और पारिवारिक जिम्मेदारी के कारण साजिश में सीमित भूमिका निभाई।
अदालत ने उन्हें तमिलनाडु के राज्यपाल के समक्ष क्षमादान (Pardon) याचिका दाखिल करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है।
तब तक उनकी गिरफ्तारी और सजा पर रोक रहेगी। बाकी सभी दोषियों को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया है।

