TIP के बिना कोर्ट में पहली बार आरोपी की पहचान हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

8 Jun 2026 10:24 AM IST

  • TIP के बिना कोर्ट में पहली बार आरोपी की पहचान हमेशा अभियोजन पक्ष के लिए नुकसानदायक नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर शिकायत में आरोपी का ठीक से वर्णन किया गया या अपराध होने के तुरंत बाद उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया, तो टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड (TIP) के बिना कोर्ट में आरोपी की पहचान (डॉक आइडेंटिफिकेशन) अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करेगी।

    जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने फिरौती के लिए अपहरण का अपराध करने के आरोपी दो व्यक्तियों की सजा बरकरार रखी।

    आरोपी ने सजा के खिलाफ तर्क दिया कि घटना के कई साल बाद बिना किसी TIP के गवाह द्वारा कोर्ट में पहली बार की गई पहचान (डॉक आइडेंटिफिकेशन) भरोसेमंद नहीं है।

    इस तर्क को खारिज करते हुए जस्टिस वराले द्वारा लिखे गए फैसले में 'रॉनी उर्फ ​​रोनाल्ड जेम्स अलवारिस आदि बनाम महाराष्ट्र राज्य, (1998) 3 SCC 625' मामले का हवाला दिया गया। कोर्ट ने कहा कि चूंकि गवाह ने आरोपियों की खास विशेषताओं को देखा था और अपराध होने के तुरंत बाद उन्हें मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया, इसलिए TIP न कराने से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं होता।

    कोर्ट ने 'रॉनी उर्फ ​​रोनाल्ड जेम्स अलवारिस आदि' (ऊपर उल्लिखित) मामले का हवाला देते हुए कहा,

    "...जहां गवाह को आरोपी के साथ बातचीत करने का मौका मिला हो या जहां गवाह को आरोपी की खास विशेषताओं को देखने का मौका मिला हो, जिससे कोर्ट में उसकी गवाही पर भरोसा किया जा सके, वहां ऐसे गवाह द्वारा कोर्ट में पहली बार की गई पहचान के सबूत को सिर्फ इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता कि कोई टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड नहीं कराई गई।"

    अपीलकर्ता के तर्क को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा,

    "मौजूदा मामले में घटना दिन-दहाड़े (सुबह 6:30 बजे) हुई थी। युवा लड़कियों (PW.2 और PW.3) को अपहरणकर्ताओं की शारीरिक विशेषताओं को देखने का साफ और बिना किसी रुकावट के मौका मिला था। यह घटना कई मिनटों तक चली और इसमें धक्का-मुक्की और पंजाबी में बातचीत भी शामिल थी। उन्होंने तुरंत पुलिस को सही शारीरिक विवरण दिया।"

    इसके आधार पर अपील खारिज की गई।

    Cause Title: HARJINDRA SINGH ETC. VERSUS THE STATE OF U.P.

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