जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: 'शांतिपूर्ण विरोध लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार'
Praveen Mishra
27 July 2026 12:34 PM IST

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत प्रदर्शन करना संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है और केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस लाठीचार्ज नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि यदि कहीं पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
चीफ़ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान CJI ने कहा, "शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत प्रदर्शन का अधिकार संविधान द्वारा पूरी तरह संरक्षित है। केवल प्रदर्शन होने से लाठीचार्ज नहीं किया जा सकता।
यदि कहीं पुलिस ने सीमा से अधिक बल प्रयोग किया है तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। पूरे देश में प्रदर्शन से निपटने के लिए एक समान पुलिस प्रोटोकॉल होना चाहिए।"
अदालत ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों—दोनों को लगी चोट समान रूप से चिंता का विषय है। सभी संबंधित याचिकाओं पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई होगी।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर, तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई के लिए राष्ट्रीय स्तर की गाइडलाइंस बनाने की मांग की है।


