ऑल इंडिया सर्विसेज़ ऑफिसर का VRS खारिज करने से पहले केंद्र सरकार को राज्य के विचारों पर गौर करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
27 May 2026 4:53 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भले ही ऑल इंडिया सर्विसेज़ से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए केंद्र सरकार की अनिवार्य मंज़ूरी ज़रूरी होती है, लेकिन सिर्फ़ इस आधार पर केंद्र सरकार को यह अधिकार नहीं मिल जाता कि वह राज्य सरकार की सिफ़ारिश पर विचार किए बिना ही VRS आवेदन खारिज कर दे।
महाराष्ट्र कैडर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी की VRS याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट और केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के फ़ैसलों को रद्द किया। इन दोनों ही संस्थाओं ने केंद्र सरकार के उस फ़ैसले को सही ठहराया था, जिसमें अपीलकर्ता की VRS याचिका खारिज की गई थी।
कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता की VRS याचिका खारिज करने का केंद्र सरकार का फ़ैसला बिना सोचे-समझे लिया गया। उसमें इस बात का ज़िक्र नहीं था कि VRS के लिए आवेदन करने के मामले में अपीलकर्ता कितना उपयुक्त है, इस बारे में राज्य सरकार की क्या सिफ़ारिश है।
कोर्ट ने कहा,
"इसलिए इस नियम के अमल को लेकर कोई दो राय नहीं हो सकती कि (ऑल इंडिया) सर्विसेज़ के किसी सदस्य द्वारा VRS के लिए किए गए अनुरोध को केंद्र सरकार की मंज़ूरी मिलना अनिवार्य है... लेकिन VRS का अनुरोध स्वीकार करने या खारिज करने के मामले में अपने विवेकाधीन अधिकार का इस्तेमाल करते समय केंद्र सरकार को राज्य सरकार द्वारा व्यक्त किए गए विचारों पर ज़रूर गौर करना चाहिए।"
कोर्ट ने आगे कहा,
"केंद्र सरकार कोई ऐसा फ़ैसला नहीं ले सकती, जो रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों से मेल न खाता हो। भले ही केंद्र सरकार, राज्य सरकार की सिफ़ारिश मानने के लिए बाध्य न हो, लेकिन राज्य सरकार की राय का अपना एक महत्व और प्रभाव होता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि राज्य सरकार ही वह संस्था है, जिसके पास उस राज्य के कामकाज से जुड़े मामलों में सेवारत अधिकारी पर सीधे तौर पर निगरानी रखने की जानकारी होती है। उसी के अधिकार क्षेत्र में अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।"
मामला
यह मामला तब सामने आया, जब अपीलकर्ता ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए अपना तीसरा आवेदन 1 अगस्त, 2019 को दिया था। गृह मंत्रालय ने 25 अक्टूबर, 2019 को इस आवेदन को यह कहते हुए खारिज किया कि अधिकारी के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई "अभी चल रही है या उस पर विचार किया जा रहा है।" इसलिए "सतर्कता (Vigilance) के नज़रिए से अधिकारी का रिकॉर्ड साफ़ नहीं है।"
यह फ़ैसला तब आया, जब राज्य सरकार ने 16 अक्टूबर, 2019 को ही VRS आवेदन स्वीकार करने की सिफ़ारिश की थी। राज्य सरकार ने साफ़ तौर पर कहा था कि किसी भी मामले में अधिकारी के ख़िलाफ़ कोई आरोप-पत्र (Chargesheet) जारी नहीं किया गया। साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई पर तो अभी सिर्फ़ विचार ही किया जा रहा है। इसमें आगे यह राय दी गई कि अधिकारी पर कोई बड़ी सज़ा लगाए जाने की संभावना नहीं थी।
अधिकारी ने इस अस्वीकृति को केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के समक्ष चुनौती दी, जिसने उसकी याचिका खारिज की। इसके बाद हाईकोर्ट ने CAT का फैसला सही ठहराया, जिसके परिणामस्वरूप यह अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आई।
फैसला
अपील स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि केंद्र सरकार का अस्वीकृति आदेश "बिना सोचे-समझे" (non-application of mind) लिया गया था, क्योंकि वह तीनों शिकायतों के बीच अंतर करने में विफल रहा, या यह समझाने में विफल रहा कि राज्य सरकार के आकलन को क्यों नज़रअंदाज़ किया जा रहा था।
न्यायालय ने कहा,
"...स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नोटिस को इस आधार पर अस्वीकार करने का केंद्र सरकार का निर्णय और आदेश... यह दर्शाता है कि इस पर ठीक से विचार नहीं किया गया। इसके अलावा, केंद्र सरकार ने राज्य सरकार की राय... और उसमें विचार की गई सामग्री पर ध्यान नहीं दिया... ताकि अपीलकर्ता को सेवा से स्वैच्छिक रूप से सेवानिवृत्त होने की अनुमति देने की सिफारिश से अलग हटने के अपने फैसले को सही ठहराया जा सके।"
न्यायालय ने टिप्पणी की कि अस्वीकृति आदेश में केवल "लंबित या विचाराधीन" जैसे सामान्य शब्दों का उपयोग किया गया, बिना इस बात का विश्लेषण किए कि क्या वास्तव में कानून के अनुसार कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित थी। इसके अलावा, न्यायालय ने अपीलकर्ता के VRS आवेदन की अस्वीकृति के बाद उसके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही में हुई अत्यधिक देरी की आलोचना की, क्योंकि अनुशासनात्मक कार्यवाही में बिना स्पष्टीकरण के होने वाली देरी स्वयं कर्मचारी के लिए नुकसानदायक हो सकती है। [देखें: State of Andhra Pradesh v. N. Radhakishan, (1998) 4 SCC 154]
उपर्युक्त बातों के आधार पर अपील स्वीकार करते हुए न्यायालय ने केंद्र सरकार से अपीलकर्ता की VRS के लिए याचिका पर फिर से सुनवाई करने को कहा।
न्यायालय ने कहा,
"...हमारी राय है कि केंद्र सरकार ने निर्णय लेने से पहले शिकायतों की विस्तार से जांच नहीं की... VRS के नोटिस को स्वीकार न करने के संबंध में... केंद्र सरकार को अपने दिनांक 25.10.2019 के निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के नोटिस की फिर से जांच करनी चाहिए।"
Cause Title: ABDUR RAHMAN VERSUS UNION OF INDIA & ORS.

