CBSE 3-Language Formula: सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी दी राहत, कक्षा 7 जैसी मिलेगी छूट
Praveen Mishra
28 Sept 2026 3:57 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को CBSE की तीन-भाषा फॉर्मूला व्यवस्था के तहत कक्षा 6 के छात्रों को भी वही राहत देने का निर्देश दिया, जो पहले कक्षा 7 के छात्रों को दी गई थी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ CBSE की तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
कक्षा 6 के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा से राहत
सुनवाई के दौरान ASG ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि कक्षा 7, 8 और 9 के छात्रों को ट्रांजिशनल रिलैक्सेशन दी गई है। इसके तहत कक्षा 10 में पहुंचने पर तीसरी भाषा के लिए कोई CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक मूल्यांकन के जरिए होगा और इसका बोर्ड परिणाम पर पास/फेल का प्रभाव नहीं होगा।
इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को भी समान छूट देने का निर्देश दिया।
चीफ जस्टिस ने कहा कि “कोई पास/फेल नहीं होगा, केवल Appearance Certificate होगा।”
99% स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि देश के 28,819 CBSE स्कूलों में से लगभग 99% स्कूलों में तीन-भाषा नीति लागू करने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। करीब 1.2% स्कूलों में अभी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं।
कोर्ट ने CBSE को निर्देश दिया कि वह एक अधिकारी नियुक्त करे, जो इन बाकी स्कूलों से संपर्क कर उनकी समस्याओं का पता लगाए।
जस्टिस बागची ने कहा कि यदि किसी स्कूल द्वारा आंतरिक मूल्यांकन में किसी छात्र को रोकने की स्थिति आती है, तो कोर्ट हस्तक्षेप करेगा।
याचिकाकर्ताओं ने 2027 तक टालने की मांग की
याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि छात्रों ने तीसरी भाषा का विकल्प इसलिए चुना क्योंकि उनके पास दूसरा विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि कई जगह शुरुआत में किताबें ऑनलाइन उपलब्ध नहीं थीं और CBSE के लगभग 28.83 लाख छात्र इस व्यवस्था से प्रभावित हैं।
उन्होंने मांग की कि कक्षा 6 के लिए इस नीति का कार्यान्वयन कम से कम 2027 तक टाल दिया जाए।
वकीलों ने छात्रों पर बढ़ते शैक्षणिक दबाव, ग्रामीण क्षेत्रों में किताबों की उपलब्धता और स्कूलों में सीमित भाषा विकल्पों का मुद्दा भी उठाया।
एक वकील ने यह सवाल भी उठाया कि अंग्रेजी को 'गैर-मातृ/गैर-देशी भाषा' की श्रेणी में कैसे रखा जा सकता है, जबकि संविधान और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में अंग्रेजी का व्यापक इस्तेमाल होता है। जस्टिस बागची ने कहा कि इस मुद्दे पर बाद में विचार किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता अपना rejoinder दाखिल करेंगे। मामले की आगे सुनवाई बाद में होगी।

