AP Stamp Act | एग्रीमेंट टू सेल पर स्टैंप ड्यूटी तभी लगेगी, जब उसके साथ पज़ेशन भी दिया जाए: सुप्रीम कोर्ट

Shahadat

15 Jan 2026 8:31 PM IST

  • AP Stamp Act | एग्रीमेंट टू सेल पर स्टैंप ड्यूटी तभी लगेगी, जब उसके साथ पज़ेशन भी दिया जाए: सुप्रीम कोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 जनवरी) को फैसला सुनाया कि आंध्र प्रदेश स्टैंप एक्ट के अनुसार, 'बिक्री के एग्रीमेंट' पर स्टैंप ड्यूटी तब तक नहीं देनी होगी, जब तक उसमें पज़ेशन देने की शर्त न हो।

    जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आंध्र प्रदेश स्टैंप एक्ट के संदर्भ में यह फैसला सुनाया। साथ ही हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि बिक्री का एग्रीमेंट एक तरह का ट्रांसफर है। इसके लिए एक्ट के शेड्यूल I-A के आर्टिकल 47A के एक्सप्लेनेशन I के तहत स्टैंप ड्यूटी और पेनल्टी का पेमेंट ज़रूरी है।

    यह मामला एक लंबे समय से चले आ रहे मकान मालिक-किराएदार के रिश्ते से जुड़ा है। अपीलकर्ता पचास साल से ज़्यादा समय से उस प्रॉपर्टी में किराएदार था। 2009 में प्रतिवादी-मकान मालकिन ने उसे प्रॉपर्टी 9 लाख रुपये में बेचने का एग्रीमेंट किया, जिसमें से 6.5 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए गए। जब विवाद हुआ और मकान मालकिन ने एग्रीमेंट से इनकार कर दिया तो किराएदार ने स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के लिए मुकदमा दायर किया।

    ट्रायल के दौरान, मकान मालकिन ने बिक्री के एग्रीमेंट को सबूत के तौर पर पेश करने पर यह तर्क देते हुए आपत्ति जताई कि यह एक तरह का ट्रांसफर है। इसके लिए आंध्र प्रदेश स्टैंप एक्ट के शेड्यूल I-A के आर्टिकल 47A के एक्सप्लेनेशन I के तहत स्टैंप ड्यूटी और पेनल्टी का पेमेंट ज़रूरी है। ट्रायल कोर्ट और बाद में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को मान लिया। निर्देश दिया कि दस्तावेज़ को पेश करने से पहले स्टैंप ड्यूटी और पेनल्टी का पेमेंट किया जाए, जिसके बाद किराएदार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

    हाईकोर्ट के फैसले से असहमत होते हुए जस्टिस नागरत्ना द्वारा लिखे गए फैसले में कहा गया कि इस मामले में बिक्री के एग्रीमेंट को "मान्य बिक्री" नहीं माना जा सकता।

    कोर्ट ने समझाया कि बिक्री के एग्रीमेंट पर बिक्री के तौर पर चार्ज तभी लगेगा, जब उसके साथ बेची जाने वाली प्रॉपर्टी का पज़ेशन भी दिया गया हो या उसका सबूत हो। इसका मतलब है कि पज़ेशन का बिक्री के एग्रीमेंट के साथ सीधा और करीबी संबंध होना चाहिए। जो पज़ेशन पहले से ही एग्रीमेंट से अलग मौजूद है, जैसे कि किराएदार के तौर पर पज़ेशन, वह इस शर्त को पूरा नहीं करता है।

    चूंकि अपीलकर्ता का प्रॉपर्टी पर पज़ेशन बिक्री के एग्रीमेंट के तहत नहीं था, बल्कि लगभग पांच दशकों की किराएदारी पर आधारित था, इसलिए कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता को स्टैंप ड्यूटी और पेनल्टी का पेमेंट करने की ज़रूरत नहीं है।

    आगे कहा गया,

    "...अपीलकर्ता के पास शेड्यूल प्रॉपर्टी का कब्ज़ा सेल एग्रीमेंट के मुताबिक नहीं था, और न ही ए.पी. स्टाम्प एक्ट के तहत बताए गए सेल एग्रीमेंट को लागू करने के बाद कब्ज़ा दिया गया। जब सेल एग्रीमेंट को लागू करने के संबंध में कब्ज़ा हासिल किया जाता है, तभी उसे डीम्ड कन्वेयंस माना जाएगा और कन्वेयंस के तौर पर स्टाम्प ड्यूटी लगाई जाएगी।"

    कोर्ट ने कहा,

    "हाईकोर्ट ने असल में यह मानकर गलती की कि प्रतिवादी और अपीलकर्ता के बीच असल में एक डीम्ड कन्वेयंस हुआ था। अपीलकर्ता इस दस्तावेज़ पर कोई अतिरिक्त ड्यूटी और पेनल्टी देने के लिए ज़िम्मेदार नहीं है और न ही यह दस्तावेज़ ड्यूटी और पेनल्टी के भुगतान के लिए ज़ब्त किया जा सकता है। इसलिए हम पाते हैं कि हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को सही ठहराने में गलती की। नतीजतन, हाईकोर्ट के दोनों विवादित आदेशों के साथ-साथ ट्रायल कोर्ट का आदेश भी रद्द किया जाता है। अपीलें उपरोक्त शर्तों पर स्वीकार की जाती हैं।"

    Cause Title: VAYYAETI SRINIVASARAO VERSUS GAINEEDI JAGAJYOTHI

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